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होली और बादर : गीत

आ रे कारे बादर
रँग बरसाने आ रे
श्याम खेलें होरी
तू बरसाने आ रे

रँग अलग अलग भर ला
लाल, बैंगनी, पीला
कोई बच ना जाए
सबको कर दे गीला
खुशियों की बारिश में
तू भिंगाने आ रे

इन्द्रधनुष से रँग ला
त्याग उदासी काली
उल्लसित जीवन, डाल
मुख पे उमंग लाली ..
जो उदास है जग में
उन्हें हँसाने आ रे

हाथों में पिचकारी
गाल पे रंग गुलाल
सब मिल खेलें होरी
अंचल धरा का लाल
जीवन में खुशियाँ भर
हर्ष जगाने आ रे

श्याम भींगे सर्वांग
गोपियाँ राधा संग
अंग उल्लास निखरे
रँग, रँग, हर एक अंग .
रँग ना छूटे पाए
ऐसो रंग लगा रे.

... नीरज कुमार नीर 

मौलिक एवं अप्रकाशित 

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Comment

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Comment by Neeraj Neer on March 17, 2014 at 6:14pm

आदरणीय प्रदीप कुमार शुक्ल साहब आपका हार्दिक आभार .. 

Comment by Neeraj Neer on March 17, 2014 at 6:14pm

आपका हार्दिक आभार लक्ष्मण धामी साहब ..

Comment by Neeraj Neer on March 17, 2014 at 6:12pm

आपका हार्दिक आभार आदरणीय  Laxman Prasad Ladiwala  साहब.

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 17, 2014 at 5:00pm

हाथों में पिचकारी
गाल पे रंग गुलाल
सब मिल खेलें होरी
अंचल धरा का लाल
जीवन में खुशियाँ भर
हर्ष जगाने आ रे

आदरणीय नीरज भाई सुंदर होली गीत के लिए बधाई

Comment by Pradeep Kumar Shukla on March 17, 2014 at 2:35pm

sundar holi geet Neeraj ji, badhai

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 17, 2014 at 12:52pm

सुन्दर प्रस्तुति | बधाई 

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