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जहाँ प्यार के, खिलें कँवल (मनमोहन छंद)

मनमोहन छंद : लक्षण: जाति मानव, प्रति चरण मात्रा १४ मात्रा, यति ८-६, चरणांत लघु लघु लघु (नगण) होता है.

अब तक थी जो ,सुलभ डगर

आगे साथी,कठिन सफ़र 

सँभल-सँभल कर ,रखें कदम

साथ चलेंगे ,जब- जब  हम

 

सब काँटों को ,चुन-चुन कर

फूल बिछाएँ,पग-पग पर

आजा चुन लें ,राह नवल

 जहाँ प्यार के ,खिलें कँवल 

 

 फूल हँसेंगे ,खिल-खिलकर

 कष्ट सहेंगे, मिलजुलकर

 पथ का होगा, सही चयन

 सही दिशा में, रहें नयन

 

न्यारी दुनिया ,के पथ पर

नूतन सपनो ,के रथ पर

आओ साथी ,चलें उधर

अम्बर धरती ,मिले जिधर 

(मौलिक एवं अप्रकाशित ) 

 

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Comment

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 1, 2014 at 8:28am

जी आ० सौरभ जी, आपकी सोच सही है बाल रचनाएँ और अच्छी लगेगीं इस छंद पर हार्दिक आभार. 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 1, 2014 at 2:35am

ऐसे छन्दों का प्रयोग बाल-रचनाओं आदि के विकास में नहीं किया जा सकता ? हो तो उचित है.

यह मेरी सोच मात्र है.

सादर बधाइयाँ


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 28, 2014 at 6:08pm

प्रिय प्राची जी आपको छंद पसंद आया बहुत- बहुत आभारी हूँ .


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on April 28, 2014 at 5:28pm

बहुत खूबसूरत छंद रचना आदरणीया राजेश जी 

आपने बहुत ही सुन्दर कथ्य को इस छंद में साधा है

आठ छः की यति पर बहुत ही सुन्दर प्रवाह बना है रचना में ...वाह! क्या कहने 

...लेकिन मुझे कथ्य के आतंरिक विन्यास और सुनियोजन में थोड़ा सा और समय देने की आवश्यकता लगी 

इया प्रस्तुति पर मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 20, 2014 at 8:59pm

आ० महेश्वरी कनेरी जी आपको छंद पसंद आया हार्दिक आभार आपका. 

Comment by Maheshwari Kaneri on April 20, 2014 at 7:41pm

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति..राजेश जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 20, 2014 at 11:16am

प्रिय राम शिरोमणि पाठक जी, आपको ये छंद पसंद आया दिल से आभारी हूँ. 

Comment by ram shiromani pathak on April 20, 2014 at 10:56am

 बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति आदरणीया   ..........  हार्दिक बधाई आपको 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 19, 2014 at 6:21pm

प्रिय अरुन ,आपको ये छंद पसंद आया मेरा लिखना कामयाब हुआ आपका हृदय तल से आभार. 

Comment by अरुन 'अनन्त' on April 19, 2014 at 5:51pm

आदरणीय बहुत ही मधुर पढ़कर बहुत ही अच्छा लगा शब्द चयन बहुत ही सुन्दर एक नए छंद से परिचय करवाने हेतु एवं इस सुन्दर छंद रचना हेतु बहुत बहुत बधाई स्वीकारें.

कृपया ध्यान दे...

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