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मनोरम छंद

(संक्षिप्त विधान : मनोरम छंद चार पक्तियों या पदों का वर्णिक छंद है. जिसके प्रत्येक पद में चार सगण और अंत में दो लघु वर्ण / अक्षर का विधान  हैं।)

लगती छबि मीत !

लगती छबि मीत मुझे मन भावन।

मन चंद चकोर समान लुभावन।।

मन प्रीत रिसे सुख पाय सुहावन।

अँखियाँ बरसे झिमके जिमि सावन।१।

 

चुपके पहले पिय नैन लड़ावत।

फिर नैन लडे हिय गेह बसावत।।

बस जात हिया फिर नींद चुरावत।

 सुख चैन चुरा दिन रैन जगावत।२।

 

मन बालगुडी नभ माहिं उडावत।

कबहूँ मन की पिय नाँव चलावत।।

रस की बतियाँ मन में छलकावत।

 फिर क्यूँ छलिया मन मोर पुकारत।३।

 

सत्यनारायण सिंह

मौलिक और अप्रकाशित

 

 

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Comment by Satyanarayan Singh on May 2, 2014 at 1:17pm
आ. डॉ. प्राची जी सादर आभार

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on May 2, 2014 at 9:34am

चुपके पहले पिय नैन लड़ावत।

फिर नैन लडे हिय गेह बसावत।।

बस जात हिया फिर नींद चुरावत।

 सुख चैन चुरा दिन रैन जगावत।२।...............अहा! अहा! बहुत सुन्दर 

मनोरम छंद पर सुन्दर प्रयास ..सुन्दर प्रस्तुति 

हार्दिक बधाई आ० सत्यनारायण सिंह जी 

Comment by Satyanarayan Singh on April 30, 2014 at 8:52pm

आ. बृजेश जी सादर  प्रोत्साहन एवं बधाई हेतु आपका ह्रदय से आभार आदरणीय.

Comment by Satyanarayan Singh on April 30, 2014 at 8:51pm

आ. जीतेन्द्र जी रचना आपको सुन्दर एवं भावपूर्ण लगी जानकर मन उत्साहित है अतएव  आपका सादर आभार आदरणीय.

Comment by Satyanarayan Singh on April 30, 2014 at 8:49pm

रचना को खूबसूरत बताकर आपने जो मान दिया है अतएव आपका सादर आभार आदरणीय

Comment by Satyanarayan Singh on April 30, 2014 at 8:48pm

आ. कुन्ती जी बधाई एवं उत्साहवर्धन हेतु आपका सादर आभार आदरणीया

Comment by Satyanarayan Singh on April 30, 2014 at 8:46pm

आ.सुशिल सरना जी प्रोत्साहन एवं बधाई हेतु आपका ह्रदय से आभारी हूँ. आदरणीय.

Comment by बृजेश नीरज on April 30, 2014 at 8:18pm

सुन्दर छंद! आपको हार्दिक बधाई!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 29, 2014 at 12:09am

अति सुंदर भाव, बधाई आदरणीय सत्यनारायण जी

Comment by Shyam Narain Verma on April 26, 2014 at 10:20am
इस खूबसूरत रचना के लिये दिली दाद कुबूल करें................

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