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मुहब्बतों की ज़मीन पर ....

मुहब्बतों की ज़मीन पर ....

वो जागती होगी
यही सोच हम तमाम शब सोये नहीं
चुरा न ले सबा नमीं कहीं
हम एक पल को भी रोये नहीं
वो रुख़्सत के लम्हात,वो अधूरे से जज़्बात
बंद पलकों की कफ़स में कैद वो बेबाक से ख्वाब
क्या वो सब झूठ था
क्यों पल पल के वादे हकीकत की धूप में
हरे होने से पहले ही बेदम हो कर झरने लगे
अटूट बंधन के समीकरण बदलने लगे
खबर न थी कि हमारी खुद्दारी
हमें इस मकाम तक ले आएगी
इज़हार और इकरार की तकरार में मुहब्बत
कच्ची मिट्टी सी हार जाएगी
हमारी ही खुद्दारी हमारी ज़बीं पे अलम तराश जाएगी
अज़ल के लिबास में हर ख़्वाहिश दम तोड़ जाएगी
मुहब्बत के ताबूत पे वक्त की सुई
खुद्दारी का हश्र लिख जाएगी
हाथों में तड़पते लम्स को बिछुड़ी हयात का दर्द समझा जाएगी
मुहब्बतों की ज़मीन पर खुद्दारी अपने अहं से कतरायेगी

सुशील सरना

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Satyanarayan Singh on May 23, 2014 at 5:18pm

सुन्दर और भावपूर्ण प्रस्तुति हेतु बहुत बहुत बधाई आदरणीय 

हमें इस मकाम तक ले आएगी 
इज़हार और इकरार की तकरार में मुहब्बत 
कच्ची मिट्टी सी हार जाएगी ................................अति सुन्दर 

Comment by Sushil Sarna on May 15, 2014 at 4:22pm

आदरणीय सौरभ पाण्डेय  जी रचना पर आपके स्नेहिल उद्गारों ने रचना को नया आयाम प्रदान  है।  आपकी इस  प्रशंसा का  हार्दिक आभार 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 15, 2014 at 1:07am

दिलकश अंदाज़ में अपनी बातों को साझा कने के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय सुशीलजी..

सादर

 

Comment by Sushil Sarna on May 4, 2014 at 2:29pm

आदरणीय मुकेश वर्मा जी रचना पर आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया   का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on May 4, 2014 at 2:28pm

आदरणीयलक्ष्मण धामी जी रचना पर आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया   का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on May 4, 2014 at 2:27pm

आदरणीया जितेन्द्र गीत जी रचना पर आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया   का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on May 4, 2014 at 2:26pm

आदरणीया गिरिराज भंडारी जी   रचना पर आपकी मधुर प्रशंसा   का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on May 4, 2014 at 2:25pm

आदरणीया कुंती मुख़र्जी  रचना पर आपकी मधुर प्रशंसा   का हार्दिक आभार। 

Comment by Mukesh Verma "Chiragh" on May 3, 2014 at 11:48am
बहुत बढ़िया आदरणीय
अच्छा लगा पढ़कर..
Comment by Mukesh Verma "Chiragh" on May 3, 2014 at 11:48am
बहुत बढ़िया आदरणीय
अच्छा लगा पढ़कर..

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