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छंद मदन/रूपमाला
(चार चरण: प्रति चरण २४ मात्रा,
१४, १० पर यति चरणान्त में पताका /गुरु-लघु)

मजदूर दिन

मजदूर दिन जग मनाता, शान से है आज।
कर्म के सच्चे पुजारी, तुम जगत सर ताज।।
प्रतिभागिता हर वर्ग की, देश आंके साथ।
राष्ट्र के उत्थान में है, हर श्रमिक का हाथ।१।

श्रम करो श्रम से न भागो, समझ गीता सार।
सोया हुआ भाग्य जागे, जानता संसार।।
श्रम स्वेद पावन गंग सम, बहे निर्मल धार।
श्रम दिलाता मान जीवन, श्रम प्रगति का द्वार।२।

अंबर खुला मजदूर का, होता इक वितान।
अवनी कठिन उसके लिए, सुमन सेज समान।।
त्यागता आराम जीवन, वह सृजन के हेतु।
धर्म ही है कर्म उसका. सफल जीवन सेतु।३।

-मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by Sarita Bhatia on May 2, 2014 at 8:52am

वाह भाई एक नए छंद का ज्ञान मिला और लाजवाब लिखा आपने बहुत बधाई 

Comment by coontee mukerji on May 2, 2014 at 2:58am

श्रम करो श्रम से न भागो, समझ गीता सार।
सोया हुआ भाग्य जागे, जानता संसार।।
श्रम स्वेद पावन गंग सम, बहे निर्मल धार।
श्रम दिलाता मान जीवन, श्रम प्रगति का द्वार।२।.....कविता के माध्यम से बहुत अच्छी सीख है.....अनेक साधुवाद.

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on May 1, 2014 at 6:41pm

सुन्दर रचना श्रमिक भाइयों के आन बान शान में सत्यनारायण जी ...बधाई
भ्रमर ५

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