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नवगीत...आजाद शुका खूंखार हुआ

नवगीत...आजाद शुका खूंखार हुआ

छत्तीस गढ़ के दो राहे पर,
तेरा मेरा साथ हुआ।
एक मात्र माशा रत्ती का
जमकर सोलह श्रृंगार हुआ।।

एक-एक मिलकर जो ग्यारह,
वह दो नम्बर व्यवहार करे।
तीन तिकड़मी सी मॅंहगाई,
जीवन भर आघात करे।
तीन-पॉंच मन राजनीति का,
आजाद शुका खूंखार हुआ।।1

चार वेद-ॠतु-वर्ण व्यवस्था,
चारों खाने चित्त हुए जब।
पंच तत्व कण के परमेश्वर-
छिन्न--िभन्न रिश्ते करते अब।
छवों शस्त्र के सात रंग-रस,
स्वर में दंगा हंुकार हुआ।।2

आदि भवानी सम है नारी,
सकल सृ-िष्ट में आकार धरे।
कर्म काण्ड में सदा रमें नर,
नौ दो ग्यारह सत् पतन वरे।
तन लंका के दसों द्वार पर,
रावण मन का संचार हुआ।।3

अष्ट योग चौबिस गुण रट कर,
लख चौरासी योनि भटकते।
सोलह-उन्निस के चक्कर में,
नौ ग्रह शुभ नक्षत्र को छलते।
शून्य प्रहर का प्रश्न पृच्छ जो,
कोरा ज्ञान अहंकार हुआ।।4

के0पी0सत्यम-मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by गिरिराज भंडारी on May 9, 2014 at 1:46pm

आदरणीय केवल भाई , बहुत सुन्दर नवगीत की रचना की है , आपको हार्दिक बधाइयाँ ॥

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on May 8, 2014 at 12:54pm

हार्दिक बधाई , अंको को खूब साधा है आपने


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on May 8, 2014 at 8:17am

बेहतरीन आदरणीय केवल प्रसाद जी बढ़िया नवगीत है बहुत बहुत बधाई आपको

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 8, 2014 at 8:13am

बहुत प्रभावशाली रचना आदरणीय केवल जी. बधाई आपको

Comment by kalpna mishra bajpai on May 5, 2014 at 3:00pm

अष्ट योग चौबिस गुण रट कर,
लख चौरासी योनि भटकते।
सोलह-उन्निस के चक्कर में,
नौ ग्रह शुभ नक्षत्र को छलते।
शून्य प्रहर का प्रश्न पृच्छ जो,
कोरा ज्ञान अहंकार हुआ।.............. आ० केवल प्रसाद सर बहुत सटीक रचना

Comment by coontee mukerji on May 5, 2014 at 1:34am

बहुत गम्भीर रचना है भाई साहब.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on May 4, 2014 at 8:59pm

सुन्दर रचना , बधाई.............

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