जयकारी/चोपई छंद (१५ मात्राओं के इस छंद में चरणान्त गुरु लघु से)
राष्ट्र सृजन में जिनका योग, उनको कहे पुरोधा लोग
जनता का मिलता सहयोग, खुशहाली का होता योग |
कानूनन जन हित का भान, सफल प्रशासक उसको मान
योग्य प्रशासक का सम्मान, तभी देश का हो उत्थान ||
जड़ चेतन का जिसको भान, उसमे ही आध्यात्मिक ज्ञान
परम पिता ने डाले प्राण, इसके मिलते बहुत प्रमाण |
जिसमे हो सेवा का भाव, मन में वह रखता सद्भाव
जिसमे भी जिज्ञासा जान, गुरुवर का वह करता मान ||
नदी के जब मिले दो छोर, विश्वासों की बढती डोर
प्राची में जब होती भोर, मन की बगिया भरे हिलोर |
श्रमिक नीव का पत्थर मान, तभी देश को हो उत्थान
सैनिक का जब हो सम्मान. देश सुरक्षित तब ही मान ||
(मौलिक व अप्रकाशित)
Comment
छंद पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार आदरणीय श्री सौरभ भाई जी
चौपई छन्द पर बहुत ही संयत रचना हुई है, आदरणीय. बहुत-बहुत बधाई !
आदरणीय अखिलेशजी ने शब्द-संयोजन पर सार्थक बात कही है.
सादर
रचना को मान देने के लिए आपका हार्दिक आभार श्री अरुण कुमार निगम जी -
जोड़े दोनो कर कर विलग, हम आपसे है नहीं विलग
आपका हार्दिक आभार श्री केवल प्रसाद जी
जीवन का लिख दिया निचोड़, हम हतप्रभ अपने कर जोड़ ..................बधाई....................
रचना सराहकर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार आदरणीया कुंती मुकर्जी | सादर
रचना पसंद कर सराहने के लिए आपका हार्दिक आभार श्री शिज्जू शकूर भाई, श्री अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी, और श्री गिरिराज भंडारी जी, प्रवाह हेतु आपका शुझाव मान्य भाई श्री गिरिराज जी
आ0 लक्ष्मण सरजी, वाह! बहुत सुन्दर छन्द। हार्दिक बधाई स्वीकारें। सादर,
नदी के जब मिले दो छोर, विश्वासों की बढती डोर
प्राची में जब होती भोर, मन की बगिया भरे हिलोर |
श्रमिक नीव का पत्थर मान, तभी देश को हो उत्थान
सैनिक का जब हो सम्मान. देश सुरक्षित तब ही मान ||.....सत्य वचन.आपको साधुवाद...लक्ष्मण जी.
आदरणीय लक्ष्मण भाई , सुन्दर चौपाई छंद रचना के लिये बधाई , आदरनीय अखिलेश भाई जी की सलाह पर ज़रूर ध्यान दीजियेगा ।
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