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कुछ दोहे (जवाहर लाल सिंह)

माली ऐसा चाहिए, किसलय को दे प्यार

खरपतवारहि छांटके, कलियन देहि निखार.

नित उठ देखे बाग़ को, नैना रहे निहार 

सिंचन, खुरपी चाहिए, मन में करे विचार

हवा ताजी तन में लगे, करे भ्रमर गुंजार,

दिल में यूं खुशियाँ भरे, होवे जग से प्यार

कर्म सबहि तो करत हैं, गर न करे प्रचार

लोग न जानहि पात हैं, जाने बस करतार     

दीपक ऐसा चाहिए, घर में करे प्रकाश

तन मन जारे आपनो, किन्तु नेह की आश.

उजियारा लेते रहें, बुझने न दें ज्योति  

समय समय पर तेल दें, कभी उभारें बाति  

(मौलिक व अप्रकाशित)

जवाहर लाल सिंह 

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Comment

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Comment by JAWAHAR LAL SINGH on May 8, 2014 at 8:52pm

आदरणीय श्री शिज्जू शकूर जी, सादर अभिवादन!

मात्रा दोष निकालने के लिए धन्यवाद और आभार

पवन सुघर तन में लगे, भ्रमर करे गुंजार ... कैसा रहेगा ?  


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Comment by शिज्जु "शकूर" on May 7, 2014 at 10:01pm

आदरणीय जवाहर लाल जी अच्छे दोहे हैं 

/हवा ताजी तन में लगे/ बस यहाँ 14 मात्रायें हो रहीं हैं

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on May 7, 2014 at 5:59am

आदरणीया श्रीमती कुंती महोदया, सादर अभिवादन!

प्रोत्साहन हेतु आपका अतिशय आभार!

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on May 7, 2014 at 5:58am

आदरणीय श्री नादिर खान साहब, सादर अभिवादन!

प्रोत्साहन हेतु आपका अतिशय आभार!

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on May 7, 2014 at 5:57am

आदरणीय श्री कुशवाहा जी, सादर अभिवादन!

प्रोत्साहन हेतु आपका अतिशय आभार!

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on May 7, 2014 at 5:56am

आदरणीय श्री श्याम नारायण वर्मा जी, आपका हार्दिक आभार!

Comment by coontee mukerji on May 7, 2014 at 1:28am

उजियारा लेते रहें, बुझने न दें ज्योति  

समय समय पर तेल दें, कभी उभारें बाति.....बहुत सुंदर बात.बहुत बहुत बधाई.

Comment by नादिर ख़ान on May 7, 2014 at 1:12am

हवा ताजी तन में लगे, करे भ्रमर गुंजार,

दिल में यूं खुशियाँ भरे, होवे जग से प्यार

उजियारा लेते रहें, बुझने न दें ज्योति  

समय समय पर तेल दें, कभी उभारें बाति..

आदरणीय जवाहर जी सुंदर दोहे कहे आपने नेक नसीहत भी दी ... बहुत खूब 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 6, 2014 at 9:35pm

माली ऐसा चाहिए, किसलय को दे प्यार

खरपतवारहि छांटके, कलियन देहि निखार.

नित उठ देखे बाग़ को, नैना रहे निहार 

सिंचन, खुरपी चाहिए, मन में करे विचार

हवा ताजी तन में लगे, करे भ्रमर गुंजार,

दिल में यूं खुशियाँ भरे, होवे जग से प्यार

कर्म सबहि तो करत हैं, गर न करे प्रचार

लोग न जानहि पात हैं, जाने बस करतार     

सारे के सारे  बढ़िया 

सादर बधाई 

Comment by Shyam Narain Verma on May 6, 2014 at 5:35pm
इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई................

कृपया ध्यान दे...

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