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बात करते गाँव की - लक्ष्मण धामी ‘मुसाफिर’

रोज    की   है   बादलों   से   छेड़खानी   आपने
और  गढ़  ली  प्यास  की  कोई  कहानी  आपने

***
चाह  रखते  हो  भगीरथ  सब  कहें  इतिहास में
पर न  खुद से  एक  दरिया  भी  बहानी  आपने

***
बात  करते  गाँव  की  पर कब  उसे  तरजीह दी
गाँव  को  तम  दे   सजाई   राजधानी    आपने

***
आपको दरिया मिली हर प्यास को सच है मगर
खोद  कूआँ  कब   निकाला  यार  पानी  आपने

***
लाख  दुख  मैं  मानता  हूँ  आपने  झेले  मगर
झोपड़ी  का  दुख  न   झेला   राजरानी  आपने

***
जानता तुम हो ‘मुसाफिर’ पर सफर ऐसा भी क्या
हो कठिन  जब  दो  घड़ी  भी रूक बितानी आपने

***
बह्र - 2122    2122    2122    212

***
लक्ष्मण धामी ‘मुसाफिर’
मौलिक और अप्रकाशित

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 14, 2014 at 11:15am

आदरणीय भाई जीतेन्द्र जी प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद .

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 14, 2014 at 11:14am

आदरणीय भुवन भाई उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद . आपने जिस शी'र में दोष की और इशारा किया और साथ ही क्रिया  देखने के लिए कहा है कौन सी क्रिया पर गौर करून बताने का कष्ट करें .

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 14, 2014 at 11:12am

आदरणीय कुंती दी उत्साहवर्धन के लिए तहेदिल से सुक्रिया .

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 14, 2014 at 11:10am

आदरणीय भाई अरुण जी और शिज्जु जी प्रसंशा के लिए आभार साथ ही भुवन जी द्वारा पैदा की गयी शंका के समाधान के लिए हार्दिक बधाई .

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 14, 2014 at 11:08am

आदरणीय भाई श्यामनारायण जी , नीरज जी, धर्मेन्द्र जी और जवाहर जी उत्साहवर्धन के लिए आप सभी का आभार .

Comment by Neeraj Neer on May 12, 2014 at 10:17pm

वाह बहुत सुन्दर ग़ज़ल.. 

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on May 12, 2014 at 5:39pm

अच्छे अश’आर हुए हैं लक्ष्मण साहब, दाद कुबूल करें।

Comment by अरुन 'अनन्त' on May 12, 2014 at 1:19pm

वाह भाई क्या कहने बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने सभी अशआर बेहद पसंद आये मेरी ओर से दिली दाद हाजिर है कुबूल फरमाएं मैं भी आदरणीय शिज्जू भाई जी की बातों के इत्तेफाक रखता हूँ.

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 12, 2014 at 8:35am

बहुत सुंदर भावपूर्ण गजल, दिली बधाई आपको आदरणीय लक्ष्मण जी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on May 7, 2014 at 9:43pm

बहुत खूब आदरणीय लक्ष्मण जी बहुत बहुत बधाई, मैं भुवनजी की बात से इत्तेफाक़ नहीं रखता में और ने हमकाफिया नहीं हो सकते इसलिये यहाँ तकाबुले रदीफ़ नहीं होगा

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