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खारे पानी के जीव

जब सूरज डूब जायेगा
सब कुछ समा जाएगा
महासागर की अतल गहराइयों में.
पर्वत का तुंग शिखर भी
नहीं बचेगा तृण मात्र
हड्डियों तक का नहीं रहेगा अस्तित्व.
जीवित रहेंगे फिर भी
खारे पानी के जीव ..
...............
नीरज कुमार नीर
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on May 18, 2014 at 12:15pm

छोटी प्यारी सुन्दर रचना बड़ी बात कह दिखा गयी
भ्रमर ५

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 16, 2014 at 10:55pm

सच! कितना कुछ कह देती है आपकी रचना, बधाई आपको आदरणीय नीरज जी

Comment by Neeraj Neer on May 16, 2014 at 6:53pm

आदरणीय अरुण भाई हार्दिक धन्यवाद आपका.. 

Comment by Neeraj Neer on May 16, 2014 at 6:52pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय लडिवाल साहब .. आपकी विस्तृत टिप्पणी से हौसलाफजाई हुई है.. स्नेह बनाये रखे, 

Comment by अरुन 'अनन्त' on May 16, 2014 at 5:21pm

आदरणीय नीरज भाई जी बहुत ही सार्थक रचना बहुत ही सटीक बयानी हुई है बधाई स्वीकारें.

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 16, 2014 at 8:45am

श्रष्टि की रचना हुई है प्रभु द्वारा तो कहते है समुद्र में कमल पुष्प पर देवी आगमन हुआ | जब अवसायन की कल्पना की 

जावे तो उसी अनुरूप केवल खारे पानी का सामुद्रिक जल में विचरण करते जीव ही रह पायेंगे | या हम यूँ कहे कि अच्छाई 

की समाप्ति पर बुराई मात्र रह जाने पर पुनः प्रभु द्वारा उद्भव की प्रक्रिया दोहराई जायेगी | विचार मंथन के लिए आपकी 

रचना बहुत अर्थ पूर्ण लगी जिसके लिए आपको हार्दिक बधाई |

Comment by Neeraj Neer on May 15, 2014 at 8:50pm

आदरणीया कुंती मुख़र्जी साहिबा बहुत बहुत धन्यवाद आपका .. आपको कविता अच्छी लगी तो कविता जरूर अच्छी ही होगी .. 

Comment by Neeraj Neer on May 15, 2014 at 8:48pm

आदरणीय शिज्जू शकूर साहब ... आपका हार्दिक धन्यवाद व्यक्त करता हूँ .. 

Comment by Neeraj Neer on May 15, 2014 at 8:47pm

आदरणीया डॉ प्राची सिंह साहिबा .. आपको कविता अच्छी लगी रचना धन्य हुई... आपके विस्तृत  कमेन्ट के लिए ह्रदय तल से आभार ..

Comment by Neeraj Neer on May 15, 2014 at 8:45pm

आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी आपका धन्यवाद..

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