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खारे पानी के जीव

जब सूरज डूब जायेगा
सब कुछ समा जाएगा
महासागर की अतल गहराइयों में.
पर्वत का तुंग शिखर भी
नहीं बचेगा तृण मात्र
हड्डियों तक का नहीं रहेगा अस्तित्व.
जीवित रहेंगे फिर भी
खारे पानी के जीव ..
...............
नीरज कुमार नीर
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by coontee mukerji on May 15, 2014 at 7:30pm

बहुत गहरे भाव लिये.....देखने में साधारण पर और ध्यान देने पर यह रचना बहुत गहरे अर्थ लिये हुए है.....साधुवाद नीरज कुमार जी. सादर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on May 15, 2014 at 5:28pm

लाजवाब प्रस्तुति है आदरणीय नीरज भाई बहुत बहुत बधाई आपको


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on May 15, 2014 at 4:38pm

आपकी रचना को दो आयामों में देख गयी आदरणीय नीरज जी 

पहला तो हैवानियत की पराकाष्ठा से या ऐसे ही किसी कारण से समाप्त होती सभ्यता में किसी राक्षस का सजीव रह जाना... जो शायद ऐसे ही अवयवों से जीवित रहता हो और सबलता पाता हो...

और दूसरा आयाम नें तो मुझे अमरीका के पूर्व उपराष्ट्रपति अल गौर की 'an inconvenient truth' पर्यावरणिक वीडियो की स्मृति करा दी जिसमें सब कुछ जब पानी में समा जाएगा...और उससे एक कदम आगे आपने खारे पानी के जीवों के सर्वाइवल की बात ख़ास तौर पर प्रस्तुत की.

दोनों ही आयामों से मुझे ये प्रस्तुति बहुत सार्थक लगी 

आपको हार्दिक शुभकामनाएं 

Comment by Shyam Narain Verma on May 15, 2014 at 3:54pm
अच्छी प्रस्तुति आदरणीय ,बधाई ...

कृपया ध्यान दे...

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