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आये अज़ल जिस गोद में ……

आये अजल जिस गोद में  ……

कितने निर्दयी हो तुम
दबे पाँव आते हो
मेरे खामोश लम्हों को
अपनी यादों से झंकृत कर जाते हो
झील की लहरों पे चाँद
लहर लहर मुस्कुराता है
मेरी बेबसी को गुनगुनाता है
सबा मेरे गेसुओं से लिपट
मेरी ख़्वाहिशों को बार बार ज़िंदा कर जाती है
तुम्हारे मुहब्बत में डूबे लम्स
मेरे लबों पे कसमसाते हैं
मगर तड़प के इन अहसासों को तुम न समझोगे
तुम क्यों नहीं समझते
मेरे तमाम मौसम तुम से शुरू होते हैं
और तुम पे ही फ़ना होते हैं
मेरी तन्हाई की हर करवट में
तुम मेरे साथ सोते हो
हर सलवट में तुम्हारी महक होती है
सिहिर जाती हूँ जब भी बादे सबा मुझे छूती है
क्या मेरी दर्द भरी सदा सुनकर भी न आओगे
मेरी प्यास तुम्हारे इंतज़ार में
मेरे इंतज़ार को अपनी यादों की मैखों का दर्द न दो
आओ और मेरे लम्हों को अपने वज़ूद का तआरुफ़ दे दो
मेरे अक्स को अपना अक्स दे दो
आये अजल जिस गोद में
वो मुहब्बत भरा इक फ़र्द दे दो


लम्स=स्पर्श , सदा=आवाज़ ,मैखों=कीलें ,बादे सबा =सुबह की हवा ,फ़र्द =शख़्श,अजल =मौत

सुशील सरना

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 683

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Comment by Sushil Sarna on June 10, 2014 at 3:00pm

आदरणीय  Saurabh Pandey   जी   रचना पर आपकी  प्रशंसात्मक अभिव्यक्ति  का हार्दिक आभार


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 7, 2014 at 4:58am

कविता की मुलामीयत प्रभावित करती है, आदरणीय ..

सादर बधाइयाँ

Comment by Sushil Sarna on June 5, 2014 at 12:15pm

आदरणीय  बृजेश नीरज  जी   रचना पर आपकी  प्रशंसात्मक अभिव्यक्ति  का हार्दिक आभार

Comment by बृजेश नीरज on June 4, 2014 at 10:57pm

बहुत सुन्दर रचना! आपको हार्दिक बधाई!

Comment by Sushil Sarna on June 4, 2014 at 6:13pm

 आदरणीया अन्नपूर्णा बाजपाई जी रचना पर आपके स्नेह का हार्दिक आभार 

Comment by Sushil Sarna on June 4, 2014 at 6:12pm

 आदरणीय गिरिराज भंडारी  जी   रचना पर आपकी  प्रशंसात्मक अभिव्यक्ति  का हार्दिक आभार

Comment by annapurna bajpai on June 4, 2014 at 7:56am

अच्छी रचना , बधाई । 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 3, 2014 at 10:05pm

आदरणीय सुशील सरन भाई , बहुत सुन्दर भाव अभिव्यक्ति हुई है , आपको बहुत बधाई ॥

Comment by Sushil Sarna on May 31, 2014 at 6:12pm

भाई गुमनाम जी आपकी स्नेहिल प्रशंसा का हार्दिक आभार 

Comment by gumnaam pithoragarhi on May 31, 2014 at 9:23am

khoob sir bahut khoob,,,

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