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जिंदगी ढूंढते रह गए तुझको ---डा० विजय शंकर

जिंदगी , कितनी सरल , खूबसूरत है तू
तुझको देखें जी भर , कि जी लें तुझको ,
कैसे रखा , कैसे पाला है , हमने तुझको,
तुझको पढ़ें मन भर , कि लिखें तुझको |

बोझ ,शौक ,मौज नाम दिए हमने तुझको
ये रीति, ये रिवाज ,ये बंदिशें , ये विधान
ये दायरे ,ये पहरे ,ये कानून , ये फरमान
ये भी तेरे हैं , तेरे बन्दों ने दिए हैं तुझको |

बाँध के रख दिया हजार बंधनों में तुम्हें
दावा यह कि सब तेरी हिफाजत के लिए है
इतनी बंदिशें तूने न देखी , न जानी होगीं ,
जितनी हमने तेरी सौगात में दे दी हैं तुझको |

सारे रूप , श्रृंगार धरती पर तेरे हैं ,तुझसे
हम अपने ढंग से सजाते रह गए तुझको
ये सजावटें, ये बनावटें हमसे दूर ले गयीं तुझको
हम कानूनों और किताबों में ढूंढते रह गए तुझको |

डा० विजय शंकर

( मौलिक और अप्रकाशित)

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Comment by Dr. Vijai Shanker on June 20, 2014 at 10:45am
बहुत बहुत धन्यवाद, आदरणीय विजय निकोर जी ,
सादर .
Comment by vijay nikore on June 20, 2014 at 8:19am

अति सुन्दर अभिव्यक्ति। बधाई, आदरणीय विजय जी।

Comment by Dr. Vijai Shanker on June 19, 2014 at 5:48pm
Yes , I , in fact wrote it when I saw in the site of Speaking Tree, a spiritual forum , in Times of India , that many seekers keep only discussing life , discussing life too much with putting so many restrictions upon it ,and missing the bliss of living it . Poems are not of any meaning to them , I wrote this in the form of a poem and posted it here. Yes, I agree that one should keep discussing life , time to time , but not that much that one misses the charm of it . That's the idea.
Thanks that you respected Dr. Prachi Singh liked it and expressed you views of appreciation .
Regards .

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on June 19, 2014 at 11:13am

ज़िंदगी की सहजता को इतनी सीमाओं में, दायरों में, अलंकारों में, परिभाषाओं में बाँध कर अब जो देखते हैं उसमें सब कुछ दीखता है बस ज़िंदगी को ही ढूढ़ते रह जाते हैं.....

बहुत सुन्दर भाव प्रस्तुति के 

हार्दिक बधाई आ० डॉ० विजय शंकर जी 

Comment by Dr. Vijai Shanker on June 15, 2014 at 9:41pm
आदरणीय श्रीमती मंजरी पांडे जी ,
रचना पर बधाई के लिए आभार ,
सादर.
Comment by mrs manjari pandey on June 15, 2014 at 9:35pm
जिंदगी , कितनी सरल , खूबसूरत है तू
तुझको देखें जी भर , कि जी लें तुझको ,
कैसे रखा , कैसे पाला है , हमने तुझको,
तुझको पढ़ें मन भर , कि लिखें तुझको |

आदरणीय डॉक्टर विजयशंकर जी बधाई स्वीकारें
Comment by Dr. Vijai Shanker on June 15, 2014 at 5:00pm
धन्यवाद एवं आभार , आ o महिमा जी ,
Comment by MAHIMA SHREE on June 15, 2014 at 4:08pm

जिंदगी , कितनी सरल , खूबसूरत है तू
तुझको देखें जी भर , कि जी लें तुझको ,
कैसे रखा , कैसे पाला है , हमने तुझको,
तुझको पढ़ें मन भर , कि लिखें तुझको |...वाह बहुत सुंदर .. हार्दिक बधाई प्रेषित है सादर

Comment by Dr. Vijai Shanker on June 13, 2014 at 12:05am
आ ० मीना पाठक जी , धन्यवाद
Comment by Meena Pathak on June 12, 2014 at 11:51pm

अति सुन्दर रचना .. बधाई

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