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गजल- चल रही है आँंधियॉं...

गजल- चल रही है आँंधियॉं...
बह्र-- 2122 2122 2122 212

जिन्दगी है आस्मां हर ओर खालीपन चुभे। 
आजकल की दास्तां हर ओर खालीपन चुभे।।

चॉंद, अपनी चॉंदनी रखता नहीं जब पास में,
मेघ-मावस से जहां हर ओर खालीपन चुभे।1

भोर की लाली चहक कर मॉंगती वर खास है,
सॉंझ को लुटती यहां हर ओर खालीपन चुभे।2

प्यार आँंखों में दिलों में दर्द का दरिया बहे,
डूबती कश्ती शमां हर ओर खालीपन चुभे।3

झॉंकते हैं अब झरोखों से सितमगर-हमसफर,
आग से उठता धुआं हर ओर खालीपन चुभें।4

धर्म-'सत्यम' का दिया कब तक जले इस देश में,
चल रही है आँंधियां हर ओर खालीपन चुभे।।5

के0पी0 सत्यम/ मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by Nilesh Shevgaonkar on July 7, 2014 at 6:07pm

बहुत ख़ूब ...इस सुन्दर ग़ज़ल के लिए बधाई 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 7, 2014 at 5:58pm

हार्दिक धन्यवाद भाई केवल जी, आपने मेरे कहे को मान दिया.

//किसी भी पोस्ट पर आपकी टिप्पणी मात्र से ही मन उत्साहित हो जाता है। आपकी उपस्थिति संजीवनी का ही कार्य करती है //

ऐसा अब भी. भाईजी ? हम सब तो इन सबों से अब बहुत आगे निकल गये हैं ..  शुभ-शुभ

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on July 7, 2014 at 5:48pm

आ0 सौरभ सरजी, सादर प्रणाम!   आपने बिलकुल सही कहा- मुझे 'समां' ही लिखना था। किसी भी पोस्ट पर आपकी टिप्पणी मात्र से ही मन उत्साहित हो जाता है। आपकी उपस्थिति संजीवनी का ही कार्य करती है।  सर जी, आपके आशीष बचनों हेतु आपका बहुत-बहुत आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on July 7, 2014 at 5:41pm

आ0 जीत भाईजी,  आपको गजल पसन्द आई। मेरे उत्साहवर्धन हेतु आपका बहुत-बहुत आभार।  सादर,


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 7, 2014 at 12:16am

वाह वाह ! बढिया ग़ज़ल के लिए दिल से दाद स्वीकारें, भाईजी. डूबती कश्ती के साथ शमां को शायद आप भी समां कहना चाह रहे हों.. . 

बहरहाल, पुनः बधाई !

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 22, 2014 at 10:07am

प्यार आँंखों में दिलों में दर्द का दरिया बहे,
डूबती कश्ती शमां हर ओर खालीपन चुभे......बहुत सुंदर, बधाई आदरणीय केवल जी

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on June 20, 2014 at 10:35pm

आ0 गुमनाम भाईजी,  आपका हृदयतल से आभार।  सादर,

Comment by gumnaam pithoragarhi on June 20, 2014 at 9:26pm

बहुत खूब..............खूबसूरत गजल .बधाई कबूलें ......................

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on June 20, 2014 at 6:09pm

आ0  धामी जी, गोपाल भाईजी,  मैं घरेलू कार्यो एवं अवकाश के कारणों से वि-िभन्न महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में उप-िस्थति देने में असमर्थ रहा। अब आपके समक्ष हूँ। आपका हृदयतल से आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on June 20, 2014 at 5:59pm

आ0   कुन्तीजी,   आपका हृदयतल से आभार।  सादर,

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