For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

वाह हमारे नेता जी!!

रक्त पिपासु कीड़ा है नाम!
दर्द देना उनका है काम!!
कहें दर्द को कम करता जी!
वाह हमारे नेता जी!!

स्वेत वस्त्र पर दिल है काला!
गरीबोँ का खाते निवाला!!
फ़िर भी वो भूखा रहता ज़ी!
वाह हमारे नेता जी!!

जनता के पैसे खा जाते !
फ़िर भी सब को आँख दिखाते !!
मै तो सज्जन हूँ कहता जी!
वाह हमारे नेता जी!!

बोलबचन बस झूठे वादे!
गंदे इनके सदा इरादे!!
बिन बुलाया भूत दीखता जी!
वाह हमारे नेता जी!!
******************************
राम शिरोमणि पाठक"दीपक"
मौलिक/अप्रकाशित

Views: 446

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by ram shiromani pathak on July 20, 2014 at 2:43pm

इस पोस्ट के लिए क्षमा चाहूंगा आदरणीया प्राची जी ........ सादर

Comment by ram shiromani pathak on July 20, 2014 at 2:43pm

इस पोस्ट के लिए क्षमा चाहूंगा आदरणीय सौरभ जी........ सादर

Comment by ram shiromani pathak on July 20, 2014 at 2:42pm

सुझाव के लिए हार्दिक आभार आदरणीय गिरिराज जी। … सादर

Comment by ram shiromani pathak on July 20, 2014 at 2:41pm

हार्दिक आभार आदरणीय भाई जीतेन्द्र जी। … सादर

Comment by ram shiromani pathak on July 20, 2014 at 2:40pm

हार्दिक आभार आदरणीय गोपाल नारायण जी। … सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on July 8, 2014 at 3:29pm

मेरे मन में भी बिलकुल यही सवाल उठा जो आ० सौरभ जी ने पूछा है....


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 7, 2014 at 3:57am

आप वही रामशिरोमणि जी हैं न ?

शुभ-शुभ


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 29, 2014 at 11:33am

आ. राम भाई , नेताओं का चरित्र चित्रण खूब किया है ! गीत मे गेयता थोड़ी बाधित लगी भाई , उच्च स्वर में पढ़ के देखियेगा एक बार ॥

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 29, 2014 at 9:14am

सच को उजागर करती रचना, बधाई आदरणीय राम भाई

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 27, 2014 at 12:04pm

प्रिय दीपक

यह कविता तुम्हारी आयु के हिसाब से बिलकुल ठीक है i  मैदान में डटे  रहो i

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

*दोहा*बरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।।*चौपाई*वह फुहार वह साथ…See More
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
yesterday
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
yesterday
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Saturday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Thursday
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Jul 5

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service