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अपना - अपना सच -- डा० विजय शंकर

अपना - अपना सच
------------------------

उसने सच का नाम लिया
लोगों ने उसे झूठा कहा ,
उसने सच बोलना चाहा ,
लोगों ने उसे बोलने न दिया ,
वो सच बोले बिना चला गया .
लोगों ने राहत की सांस ली ,
एक दूसरे से पूछा , " सच " !
गया ........, चला गया
कितना अच्छा हुआ ।

मौलिक एवं अप्रकाशित.
डा० विजय शंकर

Views: 739

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Comment by Dr. Vijai Shanker on July 8, 2014 at 8:44pm
बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय विनय कुमार सिंह जी .
Comment by Dr. Vijai Shanker on July 8, 2014 at 8:43pm
बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय डा o प्राची सिंह जी .
Comment by विनय कुमार on July 8, 2014 at 8:14pm

बड़ी गहरी बात , बधाई इस रचना के लिए..


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on July 8, 2014 at 3:44pm

सच की सत्यता से भागते हतभागी लोगों की मनोदशा पर सार्थक प्रस्तुति 

हार्दिक बधाई आ० डॉ० विजय शंकर जी 

Comment by Dr. Vijai Shanker on July 4, 2014 at 7:12pm
आदरणीय बृजेश नीरज जी ,
हार्दिक बधाई के लिए धन्यवाद .
Comment by Dr. Vijai Shanker on July 4, 2014 at 7:10pm
आदरणीय अरुण शर्मा ' अनंत ' जी ,
शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद .
Comment by बृजेश नीरज on July 1, 2014 at 7:31am
अच्छी रचना। आपको हार्दिक बधाई।
Comment by अरुन 'अनन्त' on June 30, 2014 at 5:30pm

आदरणीय विजय जी बेहद प्रभावशाली चिंतनीय बहुत कुछ कहती पंक्तियाँ बधाई इस सुन्दर कृति हेतु.

Comment by Dr. Vijai Shanker on June 29, 2014 at 10:27pm
आo विजय प्रकश जी , सच को मान्यता देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। वैसे तो अभी हमें यह तय करना है कि सच को कब कितना उजागर करना या उसे छिपा कर रखना है . धन्यवाद , सादर .
Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on June 29, 2014 at 8:44pm

आ० विजय शॅंकर जी,
सच के सच को उजागर करती इस रचना पर बधाई .

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