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प्यार , तुझे एक नया नाम देते हैं ---डा० विजय शंकर

प्यार चलो, तुझे एक नया नाम देते हैं ,
नव रूप ,नव रंग , नई पहचान देते हैं.
तेरे मतलब से मतलब निकाल देते हैं ,
बेमतलब प्यार का मतलब बता देते हैं.
तुझे तेरे स्व- अर्थ से मुक्त कर देते हैं ,
अपनत्व में लीन निस्वार्थ रूप देते हैं .
ये तेरे बदरंग , रंग निकाल देते हैं ,
पारदर्शी प्रिज्म सा रूप तुझे देते हैं .
तकने वालों को तू कांच नज़र आएगा ,
पास जिसके हो उसे ,सब रंग दिखायेगा .


मौलिक एवं अप्रकाशित.
डा० विजय शंकर

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Comment by Dr. Vijai Shanker on June 29, 2014 at 7:43pm
आ o जवाहर लाल जी , रचना स्वीकार करने के लिए धन्यवाद ।
Comment by JAWAHAR LAL SINGH on June 29, 2014 at 7:25pm

ये तेरे बदरंग , रंग निकाल देते हैं ,
पारदर्शी प्रिज्म सा रूप तुझे देते हैं .
तकने वालों को तू कांच नज़र आएगा ,
पास जिसके हो उसे ,सब रंग दिखायेगा .

सुन्दर भाव! 

Comment by Dr. Vijai Shanker on June 29, 2014 at 4:55pm
आदरणीय जीतेन्द्र जी , हार्दिक बधाई के लिए ह्रदय से बहुत बहुत धन्यवाद .
Comment by Dr. Vijai Shanker on June 29, 2014 at 4:54pm
आदरणीय गिरिराज जी , बधाई के लिए बहुत बहुत धन्यवाद .
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 29, 2014 at 10:56am

पारदर्शी प्रिज्म सा रूप तुझे देते हैं .
तकने वालों को तू कांच नज़र आएगा ,
पास जिसके हो उसे ,सब रंग दिखायेगा...........बहुत सुंदर, नमन नमन . हार्दिक बधाई आदरणीय डा.विजय जी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 29, 2014 at 10:44am

आदरनीय विजय भाई , प्यार को नया रंग रूप देने के लिये आपको बधाइयाँ ॥

Comment by Dr. Vijai Shanker on June 28, 2014 at 2:44am
आदरणीय सुश्री शालिनी रस्तोगी जी , आपको रचना अच्छी लगी , बहुत बहुत सादर धन्यवाद ।
Comment by Dr. Vijai Shanker on June 27, 2014 at 10:52pm
आदरणीय लक्ष्मण धामी जी , बहुत बहुत सादर धन्यवाद ।
Comment by shalini rastogi on June 27, 2014 at 12:02pm

नए बिम्बों का प्रयोग .. सुन्दर रचना आदरणीय !

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 27, 2014 at 11:29am

आदरणीय भाई विजय शंकर जी इस गरिमामय प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें ।

कृपया ध्यान दे...

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