For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गाड़ी रुकते ही सामने से एक छोटी बच्ची अपने पीठ पर भाई को टांगे हुए लपकी । "बाबूजी , कुछ दे दो ना , भाई को भूख लगी है" , सुनते ही एक पल को तो दया आई लेकिन फिर न जाने क्यों क्रोध आ गया । "तुम लोग भी , इतनी कम उम्र में भीख मांगने लगते हो , पता नहीं कैसे माँ बाप हैं जो पैदा करके इनको सड़क पर छोड़ देते हैं"।
" चल बाबू , ये साहब भी भाषण ही देंगे , कुछ और नहीं दे सकते" और वो दूसरे गाड़ी की ओर बढ़ गयी ।

मौलिक एवम अप्रकाशित

Views: 528

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by विनय कुमार on July 26, 2014 at 8:30pm

आभार सौरभजी एवम लक्ष्मण प्रसादजी..

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on July 26, 2014 at 4:43pm

दशा एखकर दया आना स्वाभविक है पर "व्यवसाय" बनते जा रहे रूप को देखकर क्रोध में नसीहत को "भाषण"

कहकर आगे बढ़ने की बढती प्रवर्ती घातक रूप से नासूर का तरह इस व्यवसाय को पनपा रही है, जिसके पीछे 

गिरोह तक सक्रिय देखे गए है | कहानी के जिरए इस बिंदु को उठाने की अच्छी कोशिश हुई है |


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 26, 2014 at 3:40pm

हर तरफ़ प्रोफ़ेश्नलिज्म का बोलाला है.. ’मांगता है क्या ?’ स्टाइल में ! .. उस बच्ची ने भी ऐसा ही रूप अख़्तियार कर लिया है.. ’नो नॉनसेन्स टॉक प्लीऽऽज’  के तहत.

एक बढिया प्रस्तुति के लिए बधाई.

लघुकथा के पात्रों के संवादों में तनिक कसावट कुल-प्रभाव को विन्दुवत करती है. 

शुभेच्छाएँ

Comment by विनय कुमार on July 26, 2014 at 12:46pm

आभार जितेंद्रजी..

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on July 26, 2014 at 10:16am

बहुत ही बढ़िया बिंदु पर आपने अपनी रचना साझा कर, ध्यान आकर्षित किया है आदरणीय विनय जी. रचना पर बधाई आपको

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

*दोहा*बरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।।*चौपाई*वह फुहार वह साथ…See More
18 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
19 hours ago
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
21 hours ago
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Saturday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Thursday
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Jul 5

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service