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"अतुकांत"
_________

गली के मोड़ पर जब दिखती

वो पागल लडकी

हंसती

मुस्कुराती

कुछ गाती सकुचाती,

फिर तेज कदमो

से चल

गुजर जाती

चलता रहा था क्रम

अभ्यास में उतर आई

उसकी अदाएं

हँसा गईं कई बार कई बार

सोचने पर

विवश

विधाता ने सब दिया

रूप नख-शिख

दिमाग दिया होता थोडा

और सहूर

जीवन के फर्ज निभाने का,

वय कम न थी

मगर आज...........

दिखी न वो हँसी

मोड़ तक आती वह गली

खामोश थी  |

दो कदम चल कर देखा,

भीड़ खडी थी और

सफ़ेद चादर से ढँका तन

खुला चेहरा

दहशत भरा

मुस्कुराना भूलकर |

( मौलिक अप्रकाशित )

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Comment

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Comment by Chhaya Shukla on September 24, 2014 at 9:51am

बहुत - बहुत धन्यवाद ! पवन कुमार जी सादर नमन 

Comment by ram shiromani pathak on September 24, 2014 at 9:50am
बहुत ही मार्मिक प्रस्तुति।।बहुत बहुत बधाई आदरणीया
Comment by Chhaya Shukla on September 24, 2014 at 9:50am

हार्दिक धन्यवाद ! khursheedkhairadi जी सराहना के लिए सादर नमन ! 

Comment by डॉ नूतन डिमरी गैरोला on September 24, 2014 at 5:29am

आज का यह भी एक क्रूर सत्य ... 

Comment by Chhaya Shukla on September 23, 2014 at 10:46pm

आ. भाई डॉ गोपाल जी 
आपकी प्रतिक्रिया मनोबल बढा गई अतिशय आभार 
सादर नमन ! 

Comment by Pawan Kumar on September 23, 2014 at 6:35pm

बहुत ही मार्मिक प्रस्तुति ....... बधाई सादर

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on September 23, 2014 at 6:24pm

आदरणीय छाया जी

वाह------- भी और आह------- भी i यही है जीवन i  सुन्दर सम्वेद्य i

Comment by khursheed khairadi on September 23, 2014 at 10:07am

सुन्दर प्रस्तुति हार्दिक बधाई 

Comment by Chhaya Shukla on September 22, 2014 at 10:17pm

हार्दिक धन्यवाद आ. हरिबल्लभ शर्मा जी सादर नमन ! 

Comment by harivallabh sharma on September 22, 2014 at 8:10pm

बहुत मार्मिक चित्रण हुआ ...अति उत्तम...बधाई आदरणीया.

कृपया ध्यान दे...

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