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तेरी सूरत

तेरी सूरत   बहुत     खूबसूरत  सही

तेरी सूरत  सी कोई भी सूरत नहीं

तेरी सूरत  से  जो     रूबरू हो गया

उसके बचने  की कोई  सूरत नहीं I

 

तेरी सूरत के जलवे फिजाओं में है

तेरी सूरत की   चर्चा  हवाओं   में है

तेरी सूरत में  है जैसी मस्ती भरी

वैसी कोई  अजंता की   मूरत नहीं I

 

तेरी सूरत में  गंगा   की     पाकीजगी

तेरी सूरत में आशिक की आवारगी

तेरी सूरत ही   सूरत   ख्यालों   में है

तुझसे मिलने का कोई महूरत नहीं I

 

तेरी सूरत सी    है   एक  सूरत तेरी

तेरी सूरत में   कुदरत  की कारीगरी

तेरी सूरत के सजदे में जो आ गया

उनकी आपस में  कोई कुदूरत नहीं I

 

तेरी सूरत  से    ‘गोपाल’    रोशन जहाँ

तेरी सूरत  तो   होती    नहीं    है    बयाँ

तेरी सूरत की मय है  मयस्सर जिसे

उसको फिर और मय की जरूरत नहीं

 

(मौलिक व अप्रकाशित )

 

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Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on October 17, 2014 at 11:23am

श्याम नारायन जी

आपका  बहुत-बहुत आभार i  

Comment by Shyam Narain Verma on October 17, 2014 at 10:32am

" सुन्दर भाव पूर्ण रचना के लिये आपको बधाइयाँ .................. "

सादर ................

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on October 16, 2014 at 6:51pm

आदरणीय बागी जी

आपका आशीर्वाद मिलना मेरे लिये सौभाग्य भी है और संतोष  भी  i सादर i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on October 16, 2014 at 6:49pm

जीतू भैय्या

आपका प्रेम सदैव मिलता है i यह मेरा अहोभाग्य है i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on October 16, 2014 at 6:48pm

सविता जी

यह सूरत  अनिवर्चनीय ईश्वर की है  i सादर i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on October 16, 2014 at 6:46pm

विजय सर !

आपका प्रोत्साहन सदा मिलता है  i यह मेरा सौभाग्य है i


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 16, 2014 at 1:23pm

सूरत सूरत रटते रटते, हो गयी रे बावरिया :-)

वाह वाह, शूरत से शुरुआत और सूरत पर खत्म, बढ़िया है जी, बधाई आदरणीय।

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on October 16, 2014 at 8:09am

वाह! क्या बात है. बहुत ही सुंदर. बहुत-बहुत बधाई आपको आदरणीय डा.गोपाल जी

Comment by savitamishra on October 15, 2014 at 10:37pm

सूरत की सीरत में ऐसे उलझे की अपनी ही सुरत हम भूल बैठे ... कई बार पढ़े और सुरत में ही उलझे रहें ...बहुत बहुत बढ़िया लिखा है आदरणीय चाचाजी ...सादर नमस्ते

Comment by Dr. Vijai Shanker on October 15, 2014 at 9:49pm

वाह !क्या बात है तेरी सूरत की ,
जो देखे वो बच न पाये तेरी सूरत से
उलझ के रह जाए तेरी सूरत में ,
बच न पाये किसी भी सूरत से।
बहुत सुन्दर रचना। बधाई आदरणीय डॉo गोपाल नारायण जी , सादर।

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