" त्योहारों के मौसम में इनकी बिक्री बहुत बढ़ गयी है " मुस्कुराते दुकानदारों की बातचीत सुनते हुए उसने देखा, फुटपाथ पर बिछे हुए तमाम देवी देवताओं के चित्र इसकी गवाही दे रहे थे |
" भगवान हर जगह होते हैं , उन्हें खोजने की जरुरत नहीं " , मंदिर में सुना ये प्रवचन उसे याद आ गया |
मौलिक एवम अप्रकाशित
Comment
आभार सौरभ पाण्डेय जी..
आभार आलोक मित्तल जी..
आभार राजेश कुमारी जी .
आभार श्याम नारायण वर्मा जी..
आभार जीतेन्द्र जी..
जिस ओर आपका इशारा है, भाईजी, वह एकदम से स्पष्ट है. दिल से बधाइयाँ..
बहुत सुंदर बात आपकी ...
सच कहा ..और दिवाली के बाद ये तस्वीरें कूड़े कचरे के ढेर में पड़ी मिलती हैं ,सुन्दर लघुकथा
अति सुन्दर लघु कथा। बधाई। |
बहुत ही महीन विषय को साझा किया आपने. सच! इश्वर हर जगह है किसी को दीखता है तो किसी को नहीं. बधाई आपको आदरणीय विनय जी
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