For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

डोभाल जी का मकान बन रहा था, बड़े ही धार्मिक व्यक्ति थे और प्रकृति प्रेमी भी,एक माली भी रख लिया था ,उसका कार्य एक सुन्दर बगीचे का निर्माण करना था ,वह भी धुन का पक्का था , उसने तरह-तरह के फूल ,घास ,पेड़ लगा दिए और कभी –कभी वह  सजावट के लिए रंग बिरंगे पत्थर भी उठा कर ले आता और बड़े अच्छे शिल्पी की तरह उन्हें पौधों के इर्द-गिर्द सजाता ,उस बगीचे में अब तरह तरह के  फूल खिलने लगे थे ,वही नीचे एक बड़ा काला सा पत्थर भी था जिस पर माली अपना खुरपा रगड़ता और पौधों के नीचे से खरपतवार निकालता , अब सब फूल उस पत्थर को हेय दृष्टी से देखते और कहते ,यार कैसा तुच्छ जीवन है तुम्हारा, रोज माली के खुरपे से रगड़े जाते हो,” काला -पत्थर” हमेशा चुप रहता, इधर मकान भी तैयार हो गया ,कुछ दिनों बाद वे सारे पुष्प, गृह-प्रवेश के दिन पूजा की थाली में सजा दिए गए थे ,इधर उसी माली ने उस काले पत्थर को तराश कर शिवलिंग का रूप दे दिया था और डोभाल जी का पूरा परिवार,पंडित जी के मंत्रोचार के साथ  उसकी पूजा कर रहा था और सभी  लोग एक-एक करके उन पुष्पों को उस शिवलिग पर अर्पित करते जा रहे थे I    

© हरि प्रकाश दुबे

 "मौलिक व अप्रकाशित" 

Views: 757

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Hari Prakash Dubey on November 24, 2014 at 8:02pm

 आदरणीया मीना पाठक जी रचना की सराहना के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया

Comment by Meena Pathak on November 24, 2014 at 2:09pm

शायद  खुरपी की रगड से पत्थर का आकार बदल गया था ..सुन्दर  लघुकथा कही आपने ..सादर बधाई 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 24, 2014 at 11:50am

सुंदर संदेश-पूर्ण कहानी के लिए कोटि कोटि बधाई

Comment by Hari Prakash Dubey on November 24, 2014 at 11:30am

आदरणीय सर ,

आत्मीय प्रतिक्रिया का हार्दिक आभार,आप की बात सत्य है पर आप तीसरी  पंक्ति पर गौर कीजियेगा "अच्छे शिल्पी की तरह उन्हें पौधों के इर्द-गिर्द सजाता"...मतलब माली भी बहुमुखी प्रतिभा का धनी था ! सादर प्रणाम 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on November 24, 2014 at 11:02am

हरि प्रकाश जी

सुन्दर कथ्य और तथ्य को दर्शाती कहानी i इसमें एक ही बात  खटकती है पत्थर तराशने का का काम संगकार  का है माली का नहीं  i आश है आप मेरी बात को सकारात्मक रूप से लेंगे i  सादर i

Comment by Hari Prakash Dubey on November 24, 2014 at 10:34am

आपकी आत्मीय प्रतिक्रिया का हार्दिक आभार सोमेश जी.

Comment by somesh kumar on November 24, 2014 at 9:07am

अदभुत कहानी ,हमें अपने रूप-रंग और आज की बेहतर स्थिति का दम्भ नहीं करना चाहिए और दूसरों का उपहास तो कभी नहीं उड़ना चाहिए ,वो सृजनकर्ता ना जाने किस को क्या रूप दे दे ,दुर्दिन अच्छे हो जाते हैं और अच्छे दुर्दिन |सुंदर संदेश-पूर्ण कहानी के लिए साधुवाद 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन ।फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
5 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
8 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
11 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
11 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
15 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
yesterday
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Admin's group आंचलिक साहित्य
"कुंडलिया छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी ह भाखा, सरल ऐकर बिधान सहजता से बोल सके, लइका अऊ सियान लइका अऊ…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service