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बह्र - 1212/1122/1212/22


किसी का इश्क जो हमको खुशी नहीं देता
तो यार हमको कभी बेरुखी नहीं देता

ये मामला-ए-तिज़ारत है गऱ जो समझो तो
नहीं तो हमको वो यूं बेबसी नहीं देता

बनाना दोस्त जहॉं मे तो याद ये रखना
हर एक दीप यहॉं रोशनी नहीं देता

हमारा मुल्क पढ़ाता जरूर है सबको
ये और बात सही नौकरी नही देता

जो हो सके तो लगा लेता हूं मै सीने से
मै खाली हॉंथ मे सिक्के कभी नही देता

मेरी निगाह मे इंसान हो नहीं सकता
लबों को दूसरे अपनी हंसी नही देता

न जाने कैसे ये इंसानियत बची मौला
किसी का टूटना मुझको खुशी नहीं देता

बड़े नसीब से मिलता है हुनर शेरों का
कोई किसी को यहॉं शायरी नहीं देता

तुझे जो मिलता है होता है तेरा खुद बोया
खुदा किसी को कभी शायरी नहीं देता

हमारे गर्क से तुमको सुकून मिल जाए
ये वो दुवा है जो सबको "ऋषी" नहीं देता

अनुराग सिंह "ऋषी"

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 549

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 26, 2015 at 11:55am

आदरणीय अनुराग जी सुन्दर ग़ज़ल हेतु हार्दिक बधाई 

Comment by Anurag Singh "rishi" on January 26, 2015 at 11:32am
आदरणीय गिरिराज सर आपकी सलाह वाकई श्रेष्ठ है सुधार करता हूं
सादर
Comment by Anurag Singh "rishi" on January 26, 2015 at 11:27am
आप सभी आदरणीयों को दिली आभार व्यक्त करता हूं आशीष बनाए रखें
सादर

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 26, 2015 at 10:43am

आदरणीय अनुराग भाई , बहुत अच्छी गज़ल कही है , दिली बधाइयाँ कुबूल करें ।

ये मामला-ए-तिज़ारत है गऱ जो समझो तो         ------  गर और जो एक साथ सही लगा क्या ?

ये मामला-ए-तिज़ारत है तुम अगऱ समझो -------  क्या ये सही लगेगा ?


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 26, 2015 at 8:58am

बढ़िया ग़ज़ल है अनुराग जी बधाई स्वीकार करें

Comment by somesh kumar on January 25, 2015 at 7:55am

बनाना दोस्त जहॉं मे तो याद ये रखना
हर एक दीप यहॉं रोशनी नहीं देता

हमारा मुल्क पढ़ाता जरूर है सबको
ये और बात सही नौकरी नही देता-दोनों शे'रों पर बधाई

इस मंच से जोड़ने पर ये शे'र सही नहीं लग रहा व्यापकता में बेशक सही हो

बड़े नसीब से मिलता है हुनर शेरों का
कोई किसी को यहॉं शायरी नहीं देता 

Comment by Hari Prakash Dubey on January 24, 2015 at 7:21pm

आदरणीय अनुराग सिंह "ऋषी" जी , सुन्दर रचना  .........हमारा मुल्क पढ़ाता जरूर है सबको
ये और बात सही नौकरी नही देता.......बधाई आपको !

Comment by Rahul Dangi Panchal on January 24, 2015 at 6:36pm
सुन्दर गजल भाई जी !

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