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मुहब्बत खुदा है ~ गजल

122 122 122 122

सुना था किसी से मुहब्बत खुदा है ।
हुयी तो ये जाना कोई हादसा है ।

थे तनहा कभी फिर भी अच्छे भले थे ,
सिवा दर्द के उसकी यादोँ मेँ क्या है ।

भला किस से कह दूँ भला कौन समझे ,
के जिसको लगी है वही जानता है ।

गये अपने दिल से गये अपनी जाँ से ,
ये है मर्ज ऐसी न जिसकी दवा है ।

अजब जिन्दगी के ये हालात समझो ,
वो ही वो है दिल मेँ जो दिल से जुदा है ।

मौलिक व अप्रकाशित
नीरज मिश्रा

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 23, 2015 at 9:53pm

आ. प्रेम भाई , बहुत सुन्दर ग़ज़ल हुई है , आपको दिली बधाइयाँ ॥

Comment by khursheed khairadi on February 23, 2015 at 9:33am

सुना था किसी से मुहब्बत खुदा है ।
हुयी तो ये जाना कोई हादसा है ।

आदरणीय नीरज भाई ,उम्दा ग़ज़ल हुई है |सादर अभिनन्दन |

Comment by gumnaam pithoragarhi on February 22, 2015 at 5:32pm

बहुत खूब ग़ज़ल हुई है शेर दर शेर दाद कुबूल फरमाए....

Comment by Samar kabeer on February 21, 2015 at 10:04pm
जनाब नीरज मिश्रा "प्रेम" जी ,आदाब,"मर्ज़" शब्द को ज़रूरत पडने पर "मरज़" भी बांध सकते हैं |
Comment by Neeraj Nishchal on February 21, 2015 at 5:02pm
आदरणीय रामगोपाल वर्मा जी बहुत बहुत तहे दिल से आभार ।
Comment by Neeraj Nishchal on February 21, 2015 at 4:58pm
आदरणीय मुकेश कुमार जी हार्दिक आभार ।
Comment by Neeraj Nishchal on February 21, 2015 at 4:57pm
आदरणीय उमेश भाई सादर आभार ।
Comment by Neeraj Nishchal on February 21, 2015 at 4:56pm
वाह वाह सोमेश कुमार जी बहुत खूब बहुत बहुत शुक्रिया ।
Comment by Neeraj Nishchal on February 21, 2015 at 4:54pm
आदरणीय कबीर जी बहुत बहुत शुक्रिया आपकी हौँसला हाफजाई के लिये और इसमेँ अन्यथा लेने जैसी क्या बात है बाल्कि आपने तो एक शाब्दिक समझ दी मुझे आपके इस्लाह के लिये बहुत बहुत धन्यवाद । इसी प्रकार आप हम जैसोँ का मार्गदर्शन करते रहेँ हार्दिक निवेदन है । धन्यवाद साधुवाद ।
Comment by Neeraj Nishchal on February 21, 2015 at 4:44pm
आदरणीय प्रकाश दुबे जी आपकी प्रतिक्रिया ने बहुत प्रोत्साहित किया है सादर आभार प्रकट करता हूँ ।

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