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राह : कुकुभ छन्द: हरि प्रकाश दुबे

डरना हो तो बुरे कर्म से , डरना सीखो मतवाले !

उनको चैन कभी ना मिलता , जिनके होते मन काले !!

तोल सको तो पहले तोलो, बिन तोले कुछ मत बोलो !

मौन रहो जितना संभव हो , कम बोलो मीठा बोलो !!

 

खाना हो तो गम को खाओ, आंसू पीकर खुश होना  !

गम सहने की चीज है बंधू , अपना गम न कहीं रोना !!

जला सको तो अहं जला दो , वरना अहं जला देगा !

हिरण्यकश्यप रावण के सम, तुमको भी मरवा देगा !!

 

दिखा सको तो राह दिखाओ , उसको जो पथ में भूला !

भगत सिंह ने हमें जगाया  , खुद था फांसी पर  झूला !!

मरना हो तो मरो देशहित,  मरने से मत  घबराना  !

रोज रोज तिल तिल मरने से ,अच्छा इक दिन मर जाना  !!

 

© हरि प्रकाश दुबे

"मौलिक व अप्रकाशित”

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Comment by Hari Prakash Dubey on March 5, 2015 at 2:05pm

आदरणीय सौरभ पाण्डेय  सर , रचना को स्वीकृति प्रदान करने एवं मान देने के लिए आपका बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद ,रचना संशोधन के साथ पुनः प्रस्तुत है , सादर।

Comment by Hari Prakash Dubey on March 5, 2015 at 2:01pm

आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी आपका बहुत - बहुत धन्यवाद ! सादर

Comment by Hari Prakash Dubey on March 5, 2015 at 2:00pm

आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी, रचना सुधार के साथ पुनः प्रस्तुत है ,आपकी प्रतिक्रिया से बहुत उत्साह मिला आपका बहुत - बहुत धन्यवाद ! सादर 

Comment by Hari Prakash Dubey on March 5, 2015 at 1:56pm

आदरणीय मोहन सेठी सर , ह्रदय से धन्यवाद आपको ! सादर

Comment by Hari Prakash Dubey on March 5, 2015 at 1:54pm

प्रिय सोमेश भाई , आपकी सुन्दर प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आपका ! सस्नेह

Comment by Hari Prakash Dubey on March 5, 2015 at 1:52pm

प्रिय कृष्ण मिश्र जी, आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया  के लिए बहुत बहुत धन्यवाद  !

Comment by Hari Prakash Dubey on March 5, 2015 at 1:42pm

आदरणीय डॉक्टर गोपाल नारायण सर ,रचना सुधार के साथ पुनः प्रस्तुत है , कृपया एक नज़र और देख लीजियेगा ! आभार आपका ! सादर 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on March 3, 2015 at 6:26pm

आ० हरि  प्रकाश जी

आपका परिश्रम आपकी  रचना से ही मुखर है  i भगत सिंह हमें जगाकर --इसमें कोई शब्द छूट गया है i देख लीजिये i सादर i

Comment by Hari Prakash Dubey on March 3, 2015 at 5:40pm

आदरणीय गिरिराज सर , बहुत बहुत आभार आपका ! सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 3, 2015 at 5:36pm

आदरणीय हरि प्रकाश भाई , तीनो छंद लाजवाब हैं , आपको हार्दिक बधाई , छंद रचना के लिये ॥

कृपया ध्यान दे...

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