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रंगों के पर्व होली पर

रंगों के पर्व होली पर सभी मित्रों को हार्दिक शुभकामनायें -जगदीश पंकज
उड़ने लगा गुलाल,
अबीर हवाओं में
रंगों का त्यौहार
रंगीली होली है
मस्त हवा के
झोंकों ने अंगड़ाई ले
अंगों पर कैसी
मदिरा बरसाई है
मौसम की रंगीन
फुहारों से खिलकर
बजी बावरे मन में
अब शहनाई है
लगा नाचने रोम-रोम
तरुणाई का
मौसम ने मस्ती की
गठरी खोली है
रंगों की बौछारों ने
संकेत किया
रिश्तों की अनुकूल
चुहल अंगनाई में
जीजा-साली ,कहीं
ननद-ननदोई की
रंग-रंगोली है
देवर भौजाई में
बंधन तोड़ उमर के
बौराये तन-मन
तिरछी नज़र अचूक
फागुनी गोली है
पिचकारी से बरसी
रंग फुहारों ने
तन ही क्या मन को
भीतर तक भिगो दिया
रंगों ने अंगों को
ऐसे मदमाया
बांहों में भर जाने का
संकेत किया
आज मुक्त हो
नाचें गायें मस्ती में
अपनों की अपनों से
मस्त ठिठोली है
(मौलिक और अप्रकाशित ).
-जगदीश पंकज

Views: 487

Comment

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Comment by JAGDISH PRASAD JEND PANKAJ on March 9, 2015 at 12:12am

सभी मित्रों का रचना पसंद करने और टिप्पणी के लिए हृदयतल से आभार -जगदीश पंकज


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 8, 2015 at 4:12pm

बहुत खूब , आदरणीय जगदीश भाई , बधाई ॥

Comment by Hari Prakash Dubey on March 8, 2015 at 12:31pm

आदरणीय जगदीश जी, सुन्दर रचना ,हार्दिक बधाई ! सादर 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on March 8, 2015 at 11:17am

बहुत सुंदर भावों की होली, बधाई आदरणीय जगदीश जी.

Comment by Shyam Narain Verma on March 7, 2015 at 5:17pm
इस सुंदर प्रस्तुति के लिए तहे दिल बधाई सादर

कृपया ध्यान दे...

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