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गज़ल -- कोई मर जाये, गर कभी जी ले ( गिरिराज भंडारी )

2122  1212   22 

ज़िन्दगी दी ख़ुदा ने प्यारी है 

चाहतें पर बहुत उधारी है

 

इस तरफ़ हम खड़े उधर अरमाँ

बेबसी बस लगी हमारी है

 

ख़्वाब तो रोज़ ही बुनें,  लेकिन

हर हक़ीकत लिये कटारी है

 

ख़र्च का क़द बढ़ा है रोज़ मगर

रिज़्क की शक़्ल माहवारी है

 

रिश्ते बदशक़्ल हो गये अपने

पेट की आग सब से भारी है

      

फुनगियों में लटक रहे अरमाँ

कोई सीढ़ी नहीं , न आरी है

 

तिश्नगी अश्क़ भी पिये कैसे

आँसुओं की नदी भी खारी है

 

ऐ ख़ुदा ! सिर्फ ग़म की कूँची से

मेरी तस्वीर क्यूँ उतारी है

 

कोई मर जाये, गर कभी जी ले

ज़िन्दगी मैनें जो गुज़ारी है

 

ज़िन्दगी फिर भी जी रही है तू  

बस यही बात तेरी प्यारी है  

**************************** 

मौलिक एवँ अप्रकाशित

 

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Comment by MUKESH SRIVASTAVA on March 23, 2015 at 12:09pm

 

फुनगियों में लटक रहे अरमाँ

कोई सीढ़ी नहीं , न आरी है

 

तिश्नगी अश्क़ भी पिये कैसे

आँसुओं की नदी भी खारी है

 

ऐ ख़ुदा ! सिर्फ ग़म की कूँची से

मेरी तस्वीर क्यूँ उतारी है YUN TO HER SHER UMDA BHAEE JEE - PER YE TEEN KHAAS - JINKA KOEE JAWAAB NAHEE - BADHEE

Comment by vandana on March 20, 2015 at 9:26pm

 

तिश्नगी अश्क़ भी पिये कैसे

आँसुओं की नदी भी खारी है

 

ऐ ख़ुदा ! सिर्फ ग़म की कूँची से

मेरी तस्वीर क्यूँ उतारी है

वाह बहुत बढ़िया ग़ज़ल आदरणीय 

Comment by maharshi tripathi on March 20, 2015 at 7:30pm

ऐ ख़ुदा ! सिर्फ ग़म की कूँची से

मेरी तस्वीर क्यूँ उतारी है

 

कोई मर जाये, गर कभी जी ले

ज़िन्दगी मैनें जो गुज़ारी है

  इस सुंदर गजल पर सादर बधाई आपको आ. गिरिराज भंडारी सर जी |

Comment by Meena Pathak on March 20, 2015 at 2:53pm

बहुत सुन्दर गज़ल हुई आ० गिरिराज सर ..सादर बधाई स्वीकारें 

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on March 20, 2015 at 2:34pm
बड़े ख़ूबसूरत अश’आर हुए हैं आ. गिरिराज जी, दाद कुबूल करें
Comment by Shyam Narain Verma on March 20, 2015 at 10:47am
बहुत खूबसूरत ग़ज़ल! आपको बहुत-बहुत बधाई!
Comment by Hari Prakash Dubey on March 19, 2015 at 11:40pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी  सर, शानदार रचना , हार्दिक बधाई आपको , सादर !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 19, 2015 at 11:04pm

आदरणीय अजय भाई , हौसला अफज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 19, 2015 at 11:03pm

आदरणीय बड़े भाई गोपाल जी , आपकी स्नेहिल सराहना के लिये हृदय से आभारी हूँ ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 19, 2015 at 11:02pm

आदरणीय निर्मल भाई , हौसला अफज़ाई का बेहद शुक्रिया ॥ आपका इशारा समझ गया हूँ , आवश्यक सुधार ज़रूर करूँगा ॥ आपका बहुत शुक्रिया ॥

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