For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अस्थियाँ चटकीं थीं तेरी कलाई की,
मुझसे हाँथ मिलाते हुए.

इसे समझी थी तुम, शायद,
मेरी शरारत, और,
मैं क्या समझा था, मुझे कुछ याद नही.

और अब- जबकि उसके बाद,
तुम आज तक न मिल सकी ,
सोचता हूँ - -

अस्थियों की वो चटक,
क्या एक प्रहेलिका थी
जिसका अर्थ था-
रिश्ते का 'फाइनल कट्'.

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 954

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by shree suneel on April 1, 2015 at 7:35pm
आदरणीय सौरभ पांडे सर, मेरी रचना पर आपकी बहुत हीं महत्वपूर्ण टिप्पणी आई है. निश्चित रूप से मैं आपके दृष्टिकोण को समझने की कोशिश करूंगा. आपने मेरी रचना पर समय दिया इसके लिए धन्यवाद. आशा है आगे भी आपका मार्ग दर्शन मुझे प्राप्त होता रहेगा. सादर

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 1, 2015 at 6:11pm

खेद है, कि इस रचना पर आदरणीय गोपाल नारायन जी की टिप्पणी के अलावा सारी टिप्पणियाँ भ्रामक हैं. ऐसी टिप्पणियाँ किसी नवोदित को कोई रास्ता नहीं दिखातीं.

अस्थियों के चटकने में और उंगलियों के चटकने में जो स्पष्ट अंतर है, क्या उसकी ओर किसी का ध्यान नहीं गया ?
किसी रचनाकार के प्रथम प्रयास को मिला उत्साहवर्द्धन अधिक विन्दुवत होता यदि उसे तार्किक टिप्पणियों के माध्यम से समझाया जाये.

भाई श्री सुनीलजी आप रचनारत रहें..
शुभेच्छाएँ.

Comment by shree suneel on April 1, 2015 at 1:25pm
आदरणीय डॉ विजय शंकर सर, प्रस्तुति की सराहना के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद. सादर
Comment by Dr. Vijai Shanker on April 1, 2015 at 11:00am
क्या एक प्रहेलिका थी, सुन्दर प्रस्तुति है, बधाई , आदरणीय श्री सुनील जी , सादर।
Comment by shree suneel on April 1, 2015 at 10:09am
आ० जितेन्द्र जी, उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद. सादर
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 1, 2015 at 8:51am

सुंदर प्रस्तुति आदरणीय सुनील जी. हार्दिक बधाई

Comment by shree suneel on April 1, 2015 at 12:40am
बहुत - बहुत धन्यवाद आदरणीय हरि प्रकाश जी इस प्रोत्साहन के लिए. सादर
Comment by Hari Prakash Dubey on March 31, 2015 at 11:33pm

आदरणीय  श्रीयुत  श्री सुनील जी ,सुंदर प्रस्तुति ,बधाई प्रेषित !

Comment by shree suneel on March 31, 2015 at 9:30pm
आदरणीय सुशील सरन सर, आपको पंक्तियाँ अच्छी लगीं, मेरा प्रयास सफल हुआ. सादर.
Comment by Sushil Sarna on March 31, 2015 at 8:50pm

अस्थियों की वो चटक,
क्या एक प्रहेलिका थी
जिसका अर्थ था-
रिश्ते का 'फाइनल कट्'.

बहुत सुंदर प्रस्तुति दी है आपने आदरणीय , हार्दिक बधाई।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

*दोहा*बरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।।*चौपाई*वह फुहार वह साथ…See More
4 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
4 hours ago
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
7 hours ago
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
10 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Saturday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Thursday
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Jul 5

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service