For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गजल --तू मुस्करा के देख ले दिल से लगा के देख ले

2212  2212
तू मुस्करा के देख ले
दिल से लगा के देख ले

झुकना नहीं मंजूर अब
कोई झुका के देख ले

है नाम तेरे जिन्दगी
बस आजमा के देख ले

ये खेल है दिलकस बहुत
बाजी लगा के देख ले

बुझते मुहब्बत के चिराग
अब तो जला के देख ले

कोई नहीं हमसा यहाँ 
नजरें घुमा के देख ले

मौलिक व अप्रकाशित
उमेश कटारा

Views: 754

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by umesh katara on April 5, 2015 at 9:33pm

आदरणीयNilesh Shevgaonkar जी शुक्रिया

Comment by umesh katara on April 5, 2015 at 9:32pm

आदरणीय krishna mishra 'jaan'gorakhpuriजी शुक्रिया

Comment by umesh katara on April 5, 2015 at 9:32pm

आदरणीयNazeel जी शुक्रिया

Comment by umesh katara on April 5, 2015 at 9:32pm

आदरणीय Hari Prakash Dubeyजी शुक्रिया

Comment by Hari Prakash Dubey on April 5, 2015 at 8:53pm

आ.उमेश कटाराजी इस सुन्दर ग़ज़ल पर बहुत-बहुत बधाई आपको !

/ये खेल है दिलकस बहुत
बाजी लगा के देख ले/
/बुझते मुहब्बत के चिराग
अब तो जला के देख ले/

/कोई नहीं हमसा यहाँ 
नजरें घुमा के देख ले/.......वाह !

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on April 5, 2015 at 5:16pm

क्या बात है! क्या बात है!

बड़े दिल से ख़ूब रंग में लिखी है! बधाईयां!

Comment by Nazeel on April 5, 2015 at 4:53pm

आदरणीय   उमेश भाई जी सुन्दर रचना के लिए हार्दिक  बधाई सवीकार करे । 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 5, 2015 at 10:56am

बहुत खूब ..वाह वाह 

Comment by umesh katara on April 5, 2015 at 8:08am

आदरणीय मिथिलेश वामनकरजी शुक्रिया

Comment by umesh katara on April 5, 2015 at 8:07am

आदरणीय Dr. Vijai Shanker जी शुक्रिया

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' shared their blog post on Facebook
Sunday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ravi Shukla जी"
Sunday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ashok Kumar Raktale जी"
Sunday
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

माँ

माँ यह शब्द नहींं केवलइस जग की माँ से काया है। हम सबकी खातिर अतिपावन माँ के आँचल की छाया है।१।माँ…See More
May 19
Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अगर आप यों घबरा कर मैदान छोड़ देंगे तो जिन्होने एक जुट होकर षड़यन्त्र किया है वे अपनी जीत मानेंगे।…"
May 19
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अब, जबकि यह लगभग स्पष्ट हो ही चुका है कि OBO की आगे चलने की संभावना नगण्य है और प्रबंधन इसे ऑफलाइन…"
May 18
amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
May 15
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
May 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service