“मिस मिस ! नीरज इस टॉकिंग इन हिंदी अगेन”.मनीष ने चुगली लगाते हुए टीचर से कहा .... चटाक !!!! और शिक्षाविभाग के मंत्री नीरज श्रीवास्तव जी का हाथ अचानक गाल पर पँहुचा फिर वर्तमान के धरातल पर लौट कर सामान्य होते हुए तेवरी स्वर में बोले
“कई बार चेतावनी देने के बाद आँकड़ों के अनुसार तुम्हारे विभाग में कुल २० प्रतिशत हिंदी में काम होता है मनीष जी,आय एम् टॉकिंग अगेन इन हिंदी... तुम्हारे निलंबन के आदेश दो दिन में पँहुच जायेंगे” मनीष का कद मानो यकायक छोटा हो गया.
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
Comment
हार्दिक आभार कृष्ण भैया .
बहुत- बहुत शुक्रिया मनन कुमार जी.
आ० डॉ० गोपाल भैया ,बहुत बहुत आभार आपका जो लघुकथा का सन्देश आप तक पँहुचा.इस व्यंग के माध्यम से मैं एक बात और भी स्पष्ट करना चाहती थी ,की जिस हिंदी की खातिर बचपन में जिस दोस्त ने थप्पड़ लगवाया आज वही हिंदी वाला उससे ऊपर के ओहदे पर विराजमान है खाली इंग्लिश के बल पर ही कोई ऊँचा पद हासिल नहीं कर लेता, हिंदी ,अपनी मात्रभाषा का स्थान फिर भी अन्य भाषाओँ में पहला है और पहला ही रहेगा "आय एम् टॉकिंग अगेन इन हिंदी"बोलकर विधायक उस बचपन के दोस्त को उसकी औकात दिखा रहा है शायद कथा के इस पहलु पर पाठकों का ध्यान नहीं जा रहा न जाने क्यों
आ० मोहन सेठी जी ,आपका हार्दिक आभार.
आ० मोहन सेठी जी ,आपका हार्दिक आभार.
आ० विजय शंकर जी आपको प्रस्तुति पसंद आई दिल से आभार आपका,इस व्यंग के माध्यम से मैं एक बात और भी स्पष्ट करना चाहती थी ,की जिस हिंदी की खातिर बचपन में जिस दोस्त ने थप्पड़ लगवाया आज वही हिंदी वाला उससे ऊपर के ओहदे पर विराजमान है खाली इंग्लिश के बल पर ही कोई ऊँचा पद हासिल नहीं कर लेता, हिंदी ,अपनी मात्रभाषा का स्थान फिर भी अन्य भाषाओँ में पहला है और पहला ही रहेगा "आय एम् टॉकिंग अगेन इन हिंदी"बोलकर विधायक उस बचपन के दोस्त को उसकी औकात दिखा रहा है शायद कथा के इस पहलु पर पाठकों का ध्यान नहीं जा रहा न जाने क्यों.
जिस देश में लोग अपने आप को हिंदी भाषी कहने में शर्म महसूस करें वहां ऐसी हिंदी ही हो सकती है , अच्छा व्यंग आदरणीया राजेश कुमारी जी..
वाह आदरणीया बहुत बेहतरीन लघुकथा!हार्दिक बधाई! सादर.
आदरणीया, अच्छी अंग्रेज़ियत भरी हिन्दी है। रचना के लिए बधाई, सादर।
आदरणीय दीदी
कथा का उद्देश्य और सन्देश मुखर एवं स्पष्ट है i एतदर्थ आपको बधाई .
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