For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अधूरी इच्छा (लघुकथा)

बाबूजी जी के श्राद्ध कर्म में वे सारी वस्तुएं ब्राह्मण को दान में दी गयी जो बाबूजी को पसंद थे. शय्या-दान में भी पलंग चादर बिछावन आदि दिए गए. ऐसी मान्यता है कि स्वर्ग में बाबूजी इन वस्तुओं का उपभोग करेंगे. लोगों ने महेश की प्रशंशा के पुल बांधे।

"बहुत लायक बेटा है महेश. अपने पिता की सारी अधूरी इच्छाएं पूरी कर दी."
"पर दादाजी को इन सभी चीजों से जीते जी क्यों तरसाया गया?"- महेश का बेटा पप्पू बोल उठा.

.

(मौलिक व अप्रकाशित )

Views: 882

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on July 7, 2015 at 7:39pm

आदरणीय गिरिराज जी आपने गिरि गंभीर गिरा से ग्रहणीय शेर को अर्ज किया ...आदाब अर्ज है बहुत बहुत आभार!

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on July 7, 2015 at 3:15pm

लोंक लाज वश , अधूरी इच्छा पूर्ण करनी होती है , बुजुर्गों का जीवन भले ही नर्क कर दिया हो पर मरने के बाद बेटा स्वर्ग जरुर दिलाता है पंडित का पेट भर कर . 

लघु कथा के माध्यम से समाज में चेत्नना जागृत करने के प्रयास को नमन . आदरणीय सिंह साहब जी , सादर 

Comment by kanta roy on July 7, 2015 at 1:39pm
दादा जी के कमरे में शायद टुटी खाट अब भी पडीं होगी कोने में , दीवारों में सिसकियां छुपी होगी उनकी अभी भी .. तंग दिल बच्चों को कहाँ फुरसत रही होगी उन ममता को पोषण देने के लिए .... आज वक्त आन पडा़ है अपने रूतबे को जग जाहिर करने का .... सो खुलकर रूतबा दिखा रहे है । लघुकथा अच्छी बनी है आदरणीय जवाहर लाल सिंह जी ... पंच यहाँ और तेज हो सकता था । हालांकि मै स्वंय सीखने में प्रयत्नशील हूँ अभी , इसलिए यह सिर्फ मेरा एक विचार हो सकता है ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 7, 2015 at 11:21am

बहुत खूब , आदरणीय  यही हो रहा है , हार्दिक बधाई , प्रतिक्रिया मे अभी कही गज़ल का शे र देना चाहता हूँ  ---

रहा जब तक सुनी तुमने नहीं,  जिस शख़्स की यारो

लिपट कर आज रोना क्यूँ , कि वो उत्तर नहीं देता ॥  

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on July 6, 2015 at 8:09pm

आदरणीय मोहन सेठी जी, आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार!

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on July 6, 2015 at 8:08pm

आदरणीय मिथिलेश जी, आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार!

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on July 6, 2015 at 8:06pm

उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार आदरणीया परी जी !

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on July 6, 2015 at 8:05pm

उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार आदरणीय अमन कुमार जी!

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on July 6, 2015 at 7:04pm

सही प्रहार किया आपने दिखावे की दुनिया पर ...बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on July 6, 2015 at 3:54pm

आदरणीय जवाहर जी बधाई इस संवेदनशील लघुकथा के लिए....

बाबूजी जी के श्राद्धकर्म में वे सारी वस्तुएं ब्राह्मण को दान में दी गयी जो बाबूजी को पसंद थी. शय्या-दान में भी पलंग चादर बिछावन आदि दिए गए.

ऐसी मान्यता है कि स्वर्ग में बाबूजी इन वस्तुओं का उपभोग करेंगे. अतः लोगों ने महेश की प्रशंसा के पुल बांधे।

"बहुत लायक बेटा है महेश. अपने पिता की सारी अधूरी इच्छाएं पूरी कर दी." 
"पर दादाजी को इन सभी चीजों के लिए जीते जी क्यों तरसाया गया?"- महेश का बेटा पप्पू बोल उठा.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
14 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
15 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आदमी क्या आदमी को जानता है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई रवि जी सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति का संज्ञान देर से लेने के लिए क्षमा चाहता.हूँ।…"
15 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
yesterday
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
yesterday
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । "
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दु पर सहमत…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service