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गजल -आदमी अपनी ही मर्जी का खुदा रखता है ।

कुछ भी हो,अपने मसीहा को बड़ा रखता है
आदमी अपनी ही मर्जी का खुदा रखता है
वो सरेआम हकीकत से मुकर जायेगा
गिरगिटों जैसी बदलने की अदा रखता है
तुम गरीबी को तो इनसान का गहना समझो
जो फटेहाल है वो लब पे दुआ रखता है ।
जुल्म पर जुल्म जो करता है यहाँ दुनिया में
उसके हिस्से में भी भगवान सजा रखता है ।
मार के कुंडली,खजाने पे अकेला बैठा
हक गरीबों का यहाँ सेठ दबा रखता है
एक दिन मैं तुझे आईना दिखा दूंगा "सुजान "
मेरे बारे में जो तू ख्याल बुरा रखता है ।

मौलिक व अप्रकाशित ।।

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Comment by सूबे सिंह सुजान on July 23, 2015 at 6:30am
Samar kabeer,जी आपका बहुत बहुत आभारी हूँ ।
बहर 21221122112222है ख्याल का वजन 21 ही लिया है । क्या यह नहीं ले सकते ??वैसे बहुत शाइर यह वज्न लेते रहे हैं ।
Comment by सूबे सिंह सुजान on July 23, 2015 at 6:27am
maharshi tripathi ,जी नमस्कार ।आपका बेहद शुक्रिया
Comment by maharshi tripathi on July 22, 2015 at 7:42pm

जुल्म पर जुल्म जो करता है यहाँ दुनिया में
उसके हिस्से में भी भगवान सजा रखता है ।,,,वाह ! दाद कुबुलें आ. सूबे सिंह सुजान जी |

Comment by Samar kabeer on July 22, 2015 at 7:01pm
जनाब सूबे सिंह सुजान जी,आदाब,अच्छी ग़ज़ल कही है आपने , शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाऐं ।
एक मिसरे की तरफ़ आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूँगा :-

"मेरे बारे में जो तू ख्याल बुरा रखता है"

ये मिसरा बह्र से ख़ारिज है,देख लीजियेगा ।
Comment by सूबे सिंह सुजान on July 22, 2015 at 11:59am
मार के कुंडली,खजाने पे अकेला बैठा
हक गरीबों का यहाँ सेठ दबा रखता है
Comment by सूबे सिंह सुजान on July 22, 2015 at 11:50am
Rahul Dangi,जी बहुत बहुत शुक्रिया शुक्रिया
Comment by Rahul Dangi Panchal on July 22, 2015 at 10:20am
सुन्दर
Comment by सूबे सिंह सुजान on July 22, 2015 at 7:25am
गिरिराज जी,नमस्कार ।बहुत बहुत धन्यवाद ।
मेरे बारे में जो तू ख्याल बुरा रखता है ।
इस मिसरे में ख्याल का वज्न 21 है ।
बहर है ।।
21221122112222

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 22, 2015 at 6:58am

आदरणीय सूबे सिंह भाई , अच्छी ग़ज़ल हुई है , आपको हार्दिक बधाइयाँ । ऊपर बहर लिख दिया होता तो कुछ कह पाता , एक मिसरे का बेबहर होजाने की सम्भावना है , देख लीजियेगा ।

मेरे बारे में जो तू ख्याल बुरा रखता है ।  

Comment by सूबे सिंह सुजान on July 21, 2015 at 3:28pm
धर्मेन्द्र जी,शुक्रिया

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