For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जो अभिमानवश अपना आकार बढ़ाना चाहता हैं , 
वो शायद भूल जाता है....
अहं का बढ़ता आकार ही तो अहंकार है ,
इसी वजह से द्रष्टा स्वयं को ,
दृश्य समझने की भूल करता हैं ,
जो यथार्थ में देखने वाला है , 
वह अपने को झरोखा समझ बैठता है ,
और वो अपना विस्तार प्रकृति के ,
निरंतर परिवर्तित होते हुए दृश्यों में करता है ,
इनके बनने पर स्वयं को बनता हुआ अनुभव करता हैं ,
और इनके मिटने पर स्वयं को मिटने का भय ,
ये पहेली कुछ उलझी हुई जरुर लगती है ,
परन्तु थोडा सा ध्यान दे तो समझ जायेंगे ,
ये सब अपने स्वयं के जीवन में ,
दैनिक घटना है और आती जाती हैं 

Views: 752

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Rash Bihari Ravi on April 19, 2011 at 5:05pm
dhanyabad yograj ji sauradh ji

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 18, 2011 at 11:51pm

अर्थपूर्ण और आध्यात्मिक विचारों से पगी रचना हेतु अनेकानेक बधाइयाँ..


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on April 16, 2011 at 7:23pm
बहुत सुन्दर विचार रवि भाई !
Comment by Rash Bihari Ravi on April 15, 2011 at 6:40pm
preetam ji anamika ji rajiv ji abhinav ji lata ji aur tilak raj ji is hausala afgai ke liye lakh lakh dhanyabad

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Tilak Raj Kapoor on April 14, 2011 at 10:46pm

खूबसूरत विचार।

 

Comment by Lata R.Ojha on April 14, 2011 at 9:37pm
kitni sundarta se aapne sandesh dia hai..:) waah !
Comment by Abhinav Arun on April 14, 2011 at 9:20pm
वाह बहुत खूब कविता लिखी गुरूजी आपने |
Comment by Rajeev Mishra on April 14, 2011 at 9:17pm

रवि भाई  शीर्षक  बहुत जबरजस्त और उससे जबर जास्त एक एक पंक्ति अपने आप मे सन्देश

 

Comment by Anamika on April 14, 2011 at 8:26pm
sach kaha aapne ahem ka badhta aakar hi to aakar hai.
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on April 14, 2011 at 7:42pm
bahut badhiya likha aapne guru jee

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
8 hours ago
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Jul 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Jul 14
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Jul 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service