For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अ से अंधेरा~~~~~मनोज अहसास

बड़े दिनों के बाद में आखिर
उनका बुलावा आ ही गया
सरकारी शिक्षक होने का
मन में कितना हर्ष हुआ
घर से दूर जाना था मुझको
लेकिन सोचा कोई बात नहीं
यही सत्य है इस जग का
कुछ खोकर ही कुछ पाना है
रात से बेहतर होता सवेरा
भले ही बादल वाला हो
पहुँच गया जब शिक्षा मंदिर
देखकर मन बस टूट गया
ऐसा लगा
उन्नत समाज साफ़ सुथरा जीवन
कितना पीछे छूट गया
घोर कालिमा खुरदरी भूमि
श्यामपट्ट से चेहरों तक
मैले कपड़ो में नन्हा भारत
आँखों में दर्द सजाये हुए
गंदे फर्श पर बैठा था
एक शिक्षिका निपट अकेली
बड़ी असहाय सुने सुनाय
बड़े जतन से पढ़ा रही थी
बच्चे लिखते थे तख्ती पर
मैंने देखा
चाक नहीं है
न खड़िया है
निर्धनता ने मिटटी घोल कर
तख्ती पर लिखा जब अ
मेरे मन में गूंज गया है
अ से अन्धेरा होता है
कौन है वो जिसने इनके हक की रौशनी छीन ली है
उसको ढूँढना मुश्किल है
वो थोडा थोडा हम सबमे है
हम थोडा थोडा हिस्सा दे दें
अपने जीवन से रौशनी का
इनके जीवन में रौशनी हो
मै डरा हुआ
सहमा भी हूँ
लेकिन ये मन में सोचता हूँ
सच्ची पीड़ा इनकी लिखी
इनकी मुस्कान भी लिखनी है
एक दिन कविता लिखनी है
जिसमे इनकी मुस्काने हो
जिसमे इनकी खुशहाली हो
बेहद साफ़ और खूब उजली
मुझको अपनी कविता के लिए
कुछ तो करना ही होगा
कुछ आप भी कहे तो बेहतर है


मौलिक और अप्रकाशित

Views: 656

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by मनोज अहसास on September 23, 2015 at 12:23pm
आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी
बहुत आभार
हम सबको साथ मिलकर कुछ करना ही होगा
शुक्रिया
सादर
Comment by मनोज अहसास on September 23, 2015 at 12:22pm
आदरणीय मिथिलेश जी
आपके अपार स्नेह का दिल से शुक्रगुजार हूँ
पुनः रचना पर काम करता हु
इस तरह की रचनाओ के लिए शिल्प की जानकारी कहाँ मिल सकती है
ये मार्गदर्शन दें
सादर
Comment by pratibha pande on September 23, 2015 at 11:55am

अ ' से अँधेरा होता है बेशक 

'आ' कर दें ,पीछे हाथ लगाकर 

बन जाये "आ' से आन्दोलन 

देखें तब  कैसे कोई आकर 

छीने इन बच्चों का यूं हक़  

आपकी रचना का भाव मेरे दिल के करीब हैं ,, बधाई आपको इस रचना के लिए आदरणीय मनोज जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on September 22, 2015 at 11:43pm

आदरणीय मनोज भाई, 

आपने बहुत अच्छा विषय उठाया. प्लॉट बहुत बढ़िया बनाया. कविता का मर्म आँखों को नम भी कर गया क्योकि इस सत्य का अनुभव सरकारी नौकरी करते हुए कभी न कभी होता ही है. गाँव के पाठशालाओं का आलम कई कई बार देखा भी है. इस प्रस्तुति  में आपके अनुभव के प्रभाव ने इसे जीवंत भी कर दिया. यहाँ तक सब बहुत बढ़िया ...... 

लेकिन शिल्प स्तर पर आपसे अधिक सुगठित रचना की आशा रहती है. आपकी इसी शैली की बहुत अच्छी रचनाएँ पढ़ चुका हूँ. इतने बढ़िया प्लॉट और मर्म को एक बढ़िया ढंग से शाब्दिक किये जाने की अपेक्षा ने मुझे संक्षिप्त टीप के लिए बाध्य किया. 

आप बहुत ज्यादा जल्दबाजी में रचनाएँ पोस्ट कर रहे हैं. इस रचना को थोड़ा और समय दीजिये. अभी ये अच्छी रचना है लेकिन ये ओबीओ की श्रेष्ट रचनाओं में सम्मिलित होने की योग्यता रखती है. भाव स्तर पर आपकी रचना सीधे दिल में उतरी है मगर आप जानते है मंच शिल्प के प्रति भी उतना ही सजग है. 

कभी कभी कोई अच्छी चीज जाया होते दिखती है तो दुःख होता है. बस यही बात है संक्षिप्त टीप का कारण. आपने प्रश्न पूछा इसलिए आज कह रहा हूँ अन्यथा आगे पुनः आता इस रचना पर.

आशा है मैं अपनी बात स्पष्ट कर सका हूँ. सादर 

Comment by मनोज अहसास on September 22, 2015 at 10:23pm
बहुत आभार भाई मिश्रा जी
सादर
Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on September 22, 2015 at 9:40pm

लाजव़ाब भाई मनोज जी! शिल्पस्तर का मुझे ज्ञान नही पर आपने कविता में भारत की शिक्षा व्यवस्था की सच्चाई जिस तरह से रक्खी है..उसके लिए अशेष बधाईयां!!

Comment by मनोज अहसास on September 22, 2015 at 9:34pm
आदरणीय मिथिलेश जी सादर नमस्कार
आपकी उपस्थिति महत्वपूर्ण है
पर संक्षिप्त टिप्पणी यह बता रही है
की सब कुछ ठीक नहीं है
पुनः मार्गदर्शन का अभिलाषी हूँ
सादर
Comment by मनोज अहसास on September 22, 2015 at 9:32pm
बहुत आभार भाई पंकज मिश्रा जी
आपने बहुत निकट से इन हालात को देखा है
आपका अनुभव ही आपको कविता के निकट लाया है
शुक्रिया
सादर
Comment by मनोज अहसास on September 22, 2015 at 9:30pm
बहुत बहुत आभार
आदरणीय रवि शुक्ल जी
सादर
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on September 22, 2015 at 4:35pm
एक अत्यंत ज्वलंत मुद्दे पर संवेदना के जल से भरी हुई भाव सरिता प्रवाहित हो रही हो मानो; जो अतृप्त मानवता को वैसे ही तृप्ति दान करना चाह रही है जैसे कि "भगीरथ की भागीरथी गंगा"


बधाई हो

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
17 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
yesterday
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
Monday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
Monday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
Monday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रबंधन समिति से आग्रह है कि इस पोस्ट का लिंक उस ब्लॉक में डाल दें जिसमें कैलंडर डाला जाता है। हो…"
Monday
आशीष यादव posted a blog post

गन्ने की खोई

पाँच सालों की उम्र,एक लोहे के कोल्हू में दबी हुई है।दो चमकदार धूर्त पत्थर (आंखें) हमें घुमा रहे…See More
Monday
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत अच्छे दोहे रचे गए हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
Monday
आशीष यादव commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"एक बेहतरीन ग़ज़ल रचा है आपने। बिलकुल सामयिक।  इस बढ़िया रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
Monday
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"सदियों से मनुष्य प्रकृति का शोषण करता रहा है, जिसे विकास समझता रहा है वह विनास की एक एक सीढ़ी…"
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service