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ग़ज़ल - मगर मज़ा ही कहाँ है अगर न तू शामिल (गिरिराज भंडारी )

1212    1122    1212    22  /112

तेरे खतों में  रहा यूँ तो रंगो बू शामिल

मगर मज़ा ही कहाँ है अगर न तू शामिल

 

मुझे अधूरी किसी चीज़ की नहीं हाजत

मेरी हयात में हो जा तू हू ब हू शामिल

 

बिन आरज़ू भी कभी ज़िन्दगी कटी है कहीं

तू कर ले ज़िन्दगी में मेरी आरजू शामिल

 

किसी की याद भी तनहाइयों का दरमाँ है

किसी की याद की कर ले तू ज़ुस्तजू शामिल

 

झिझक नहीं , न जमाने से डर मेरे यारा

तू आ के सामने सब के हो रू ब रू शामिल

 

भुलाना इतना भी आसाँ नहीं है यादों को

है तेरी याद मेरे दिल के कू ब कू शामिल

असर दिखा के रहेगा ज़रूर इक दिन वो

तेरे लहू में अगर है मेरा लहू शामिल

सफर सफर सा लगा  और रास्ता मंज़िल

मेरे सफर में हुआ आज खूब रू शामिल

मज़ा लड़ाई का आता नहीं है बेख़ुद से

मज़ा जो चाहो,  करो खूब जंग जू शामिल   

***************************************

मौलिक एवँ अप्रकाशित

 

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 2, 2015 at 12:13pm

आदरनीय कृष्णा भाई , गज़ल की उन्मुक्त सराहना के लिये आपका आभारी हूँ ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 2, 2015 at 12:11pm

आदरनीया राजेश जी , हौसला अफ्ज़ाई के लिये आपका तहे दिल से शुक्रिया ॥

आदरणीया पहले मै मिसरे को वही लिखा था , जिसकी आप सलाह दे रहे हैं - तू जिन्दगी में मेरी कर ले आरजू शामिल   , लेकिन  मुझे लगा कि ये भ्रम हो रहा है कि , मेरी शब्द ज़िन्दगी के लिये है या ,आरजू के लिये , और मै मेरी आरजू  कहना चाहता था , इसी लिये मै -
तू कर ले ज़िन्दगी में,  मेरी आरजू शामिल. - किया , ये बात सही है कि फ्लो आपकी कहन मे जियादा है , मै फिर से सोचता हूँ , सलाह के लिये आपका आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 2, 2015 at 12:05pm

अदरनीय आशुतोष भाई , गज़ल की सराहना के लिये आपका आभारी हूँ ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 2, 2015 at 12:05pm

आदरणीय समर भाई , आपकी हौसला अफज़ाई ने गज़ल कहना सार्थक कर दिया । आपका तहे दिल से शुक्रिया ।

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on October 2, 2015 at 11:10am

मुझे अधूरी किसी चीज़ की नहीं हाजत

मेरी हयात में हो जा तू हू ब हू शामिल........वाह  वाह...जानिसार इस हासिले गज़ल शेर पर!

बिन आरज़ू भी कभी ज़िन्दगी कटी है कहीं

तू कर ले ज़िन्दगी में मेरी आरजू शामिल................लाजव़ाब...लाजव़ाब!

आ० गिरिराज सर इस लाजव़ाब बुलंद गजल पर शेर दर शेर दाद ही दाद पेश है! नमन्!

 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 2, 2015 at 10:43am

तेरे खतों में  रहा यूँ तो रंगो बू शामिल

मगर मज़ा ही कहाँ है अगर न तू शामिल---वाह  मतले ने ही दिल लूट लिया 

 

मुझे अधूरी किसी चीज़ की नहीं हाजत

मेरी हयात में हो जा तू हू ब हू शामिल---वाह्ह्ह्हह  वाह्ह्ह्हह 

 

बिन आरज़ू भी कभी ज़िन्दगी कटी है कहीं

तू कर ले ज़िन्दगी में मेरी आरजू शामिल----तू जिन्दगी में मेरी कर ले आरजू शामिल ---करके देखिये मेरे ख़याल से बह्र बेहतर होगी 

असर दिखा के रहेगा ज़रूर इक दिन वो

तेरे लहू में अगर है मेरा लहू शामिल----बहुत ही बेहतरीन शेर 

इस शानदार ग़ज़ल के लिए दिल से दाद कबूलें आ० गिरिराज जी 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on September 29, 2015 at 3:06pm

आदरणीय गिरिराज भाईसाब ..सभी अशार एक से बढ़कर एक हैं इस शानदार ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई सादर

Comment by Samar kabeer on September 28, 2015 at 11:13pm
जनाब गिरिराज भंडारी जी,आदाब,वाह वाह वाह,क्या ही शानदार ग़ज़ल कही है आपने,सुनकर दिल बाग़ बाग़ हो गया,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाऐं।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 28, 2015 at 10:13pm

आदरणीय श्याम भाई , उत्साह वर्धन के लिये आपका बहुत शुक्रिया ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 28, 2015 at 10:12pm

आदरनीय मिथिलेश भाई , आपकी उन्मुक्त सराहना के लिये आपका हृदय से आभारी हूँ  ॥

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