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1222 1222 1222 1222

तेरे नैनों के पर्दे को उठा लेती तो बेहतर था।
निगाहों को मेरे मुख पर टिका देती तो बेहतर था।।

हाँ बेहतर तो यही होता कि तुझमें खो ही जाता मैं।
औ तुम भी मेरी आँखों में समा जाती तो बेहतर था।।

न खाली हो सके तुम भी बहुत मशरूफ थे हम भी।
घड़ी कोई हमें तुमसे मिला देती तो बेहतर था।।

पता है, मेरे इस दिल में कई सपने सुहाने थे।
तू अपने ख़्वाब सारे जो बता देती तो बेहतर था।।

यहाँ खोने का डर था तो वहाँ संकोच का बंधन।
कदम तुम ही अगर आगे बढ़ा देती तो बेहतर था।।


मौलिक अप्रकाशित

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Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on October 22, 2015 at 1:56pm
आदरणीय कान्ता रॉय मैम सादर धन्यवाद। आपकी प्रतिक्रिया, मनोबल बढ़ाती है।
Comment by kanta roy on October 22, 2015 at 6:34am
यहाँ खोने का डर था तो वहाँ संकोच का बंधन।
कदम तुम ही अगर आगे बढ़ा देती तो बेहतर था।।..... वाह !!! बहुत ही शानदार ! बधाई हो ।
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on October 21, 2015 at 4:58pm
आदरणीय राहिला जी सादर धन्यवाद।
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on October 21, 2015 at 4:58pm
आदरणीय मिथिलेश सर रचना को आपका आशीर्वाद मिला; अच्छा लग रहा। ये आप लोगों के सहयोग और ओबीओ मंच की देना है।
Comment by Rahila on October 21, 2015 at 4:17pm
आद. पंकज जी! बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल "न खाली हो. ..तो बेहतर था "वाह कितनी खूबसूरत ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on October 21, 2015 at 3:28pm

आदरणीय पंकज जी, बहुत ही शानदार ग़ज़ल हुई है. सभी अशआर बेहतरीन है. आदरणीय आमोद जी की इस्लाह से मतला भी निखर गया. इस शानदार ग़ज़ल पर दिल से दाद कुबूल फरमाएं. ये शेर तो बस कमाल है -

न खाली हो सके तुम भी बहुत मशरूफ थे हम भी।
घड़ी कोई हमें तुमसे मिला देती तो बेहतर था।।..................... वाह वाह 

यहाँ खोने का डर था तो वहाँ संकोच का बंधन।
कदम तुम ही अगर आगे बढ़ा देती तो बेहतर था।।........... लाजवाब 

सादर 

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on October 19, 2015 at 9:08pm
आमोद बिन्दौरी जी के सुझाव के अनुरूप मतला पढ़ा जाये-
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on October 19, 2015 at 9:07pm
बहुत दिनों बाद आगमन;स्वागत है- आपका भी और आपके सुझाव का भी मनोज भाई।
Comment by मनोज अहसास on October 19, 2015 at 7:59pm
आदरणीय पंकज जी बहुत खूब
बेहतर
मतला थोड़ा और समय चाहता हूँ
सादर
Comment by amod shrivastav (bindouri) on October 19, 2015 at 7:40pm
जो तुम नैनो के पर्दे को उठा लेती तो बेहतर था ,,,,,,,,को कर के देखिये बांकी बहुत सुन्दर है बधाई

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