For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

"हैलो..शोभा!कैसी हो।"
"मैं ठीक हूं । आप कैसे हैं?"
"बढ़िया,अरे सुनो मैं फिर नहीं आ पा रहा हूं।यहां सीमा पर माहौल लगातार खराब चल रहा है।छुट्टियों की अर्जियां निरस्त हो गयी।"
"दोबारा..भला ये क्या बात हुई"उसके स्वर में उदासी छा गई ।
"यूं उदास ना हो, फौजी की बीबी को हर हाल में सब्र रखना चाहिए।अच्छा ये बताओ..अगर आज स्वयं भगवान तुम्हें कोई वरदान मांगने को कहते तो क्या मांगती? "
"यही मांगती कि बस तुम इसी वक्त मेरे पास आ जाओ"
"ओह..प्रिय,कुछ और मांगना था । ये ख्वाइश तो भगवान ने पूरी कर दी।
वो पूरे साजो सामान के साथ ,फोन कान से लगाये, दरवाजे पर खड़ा,शरारत से मुस्कुरा रहा था ।
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 1081

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Rahila on February 24, 2016 at 1:27pm
बहुत आभार आदरणीय योगराज सर जी!इतने दिनों बाद आपने मेरी रचना को पढ़ने के काबिल समझा।मेरा लेखन ही सार्थक हो गया । बहुत शुक्रिया ।सादर

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on February 24, 2016 at 9:58am

बहुत प्यारी और मासूमियत भरी लघुकथा कही है राहिला जी, बधाई स्वीकार करेंI 

Comment by Rahila on November 5, 2015 at 9:08pm
बहुत शुक्रिया आदरणीया राजेश कुमारी जी! आप सच कह रही है ये बात मुझसे अच्छा कौन समझ सकता है । बहुत आभार ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 5, 2015 at 8:51pm

बहुत प्यारी  लघु कथा है दिल खुश हो गया पढके वैसे सच में फौजी बहुत प्रैंक खेलते हैं कभी कभी |हार्दिक बधाई राहिला जी |

Comment by Rahila on October 29, 2015 at 1:20pm
बहुत आभार आदरणीय नादिर ख़ान साहब । बहुत शुक्रिया ।
Comment by नादिर ख़ान on October 29, 2015 at 11:19am

 आदरणीया राहिला जी खूबसूरत अंदाज़ में आपने अच्छी लघुकथा कही बहुत मुबारकबाद .... 

Comment by Rahila on October 29, 2015 at 8:20am
बहुत शुक्रिया आदरणीय गिरिराज जी । इस प्यारी सी टिप्पणी के लिये । बहुत आभार ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 29, 2015 at 6:31am

प्यारी छेड़ छाड़ भरी अच्छी कथा लगी , आदरणीया आपको बधाई ।

Comment by Rahila on October 28, 2015 at 2:35pm
बहुत आभार प्रशंसा के लिये, आदरणीय मिथलेश वामनकर जी! बहुत शुक्रिया ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on October 28, 2015 at 2:00pm

बहुत प्यारी सी कथा 

मन को भीतर तक छू गई 

आदरणीया राहिला जी इस प्रस्तुति पर बहुत बहुत बधाई 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
2 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
17 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
18 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
23 hours ago
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Admin's group आंचलिक साहित्य
"कुंडलिया छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी ह भाखा, सरल ऐकर बिधान सहजता से बोल सके, लइका अऊ सियान लइका अऊ…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहै हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Monday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . रिश्ते

दोहा पंचक. . . . रिश्तेमिलते हैं  ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।निभा रहे संबंध सब , जैसे हो दस्तूर…See More
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन व आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सुंदर सुझाव के लिए हार्दिक आभार।"
Saturday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service