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"हैलो..शोभा!कैसी हो।"
"मैं ठीक हूं । आप कैसे हैं?"
"बढ़िया,अरे सुनो मैं फिर नहीं आ पा रहा हूं।यहां सीमा पर माहौल लगातार खराब चल रहा है।छुट्टियों की अर्जियां निरस्त हो गयी।"
"दोबारा..भला ये क्या बात हुई"उसके स्वर में उदासी छा गई ।
"यूं उदास ना हो, फौजी की बीबी को हर हाल में सब्र रखना चाहिए।अच्छा ये बताओ..अगर आज स्वयं भगवान तुम्हें कोई वरदान मांगने को कहते तो क्या मांगती? "
"यही मांगती कि बस तुम इसी वक्त मेरे पास आ जाओ"
"ओह..प्रिय,कुछ और मांगना था । ये ख्वाइश तो भगवान ने पूरी कर दी।
वो पूरे साजो सामान के साथ ,फोन कान से लगाये, दरवाजे पर खड़ा,शरारत से मुस्कुरा रहा था ।
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Rahila on February 24, 2016 at 1:27pm
बहुत आभार आदरणीय योगराज सर जी!इतने दिनों बाद आपने मेरी रचना को पढ़ने के काबिल समझा।मेरा लेखन ही सार्थक हो गया । बहुत शुक्रिया ।सादर

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on February 24, 2016 at 9:58am

बहुत प्यारी और मासूमियत भरी लघुकथा कही है राहिला जी, बधाई स्वीकार करेंI 

Comment by Rahila on November 5, 2015 at 9:08pm
बहुत शुक्रिया आदरणीया राजेश कुमारी जी! आप सच कह रही है ये बात मुझसे अच्छा कौन समझ सकता है । बहुत आभार ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 5, 2015 at 8:51pm

बहुत प्यारी  लघु कथा है दिल खुश हो गया पढके वैसे सच में फौजी बहुत प्रैंक खेलते हैं कभी कभी |हार्दिक बधाई राहिला जी |

Comment by Rahila on October 29, 2015 at 1:20pm
बहुत आभार आदरणीय नादिर ख़ान साहब । बहुत शुक्रिया ।
Comment by नादिर ख़ान on October 29, 2015 at 11:19am

 आदरणीया राहिला जी खूबसूरत अंदाज़ में आपने अच्छी लघुकथा कही बहुत मुबारकबाद .... 

Comment by Rahila on October 29, 2015 at 8:20am
बहुत शुक्रिया आदरणीय गिरिराज जी । इस प्यारी सी टिप्पणी के लिये । बहुत आभार ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 29, 2015 at 6:31am

प्यारी छेड़ छाड़ भरी अच्छी कथा लगी , आदरणीया आपको बधाई ।

Comment by Rahila on October 28, 2015 at 2:35pm
बहुत आभार प्रशंसा के लिये, आदरणीय मिथलेश वामनकर जी! बहुत शुक्रिया ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on October 28, 2015 at 2:00pm

बहुत प्यारी सी कथा 

मन को भीतर तक छू गई 

आदरणीया राहिला जी इस प्रस्तुति पर बहुत बहुत बधाई 

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