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जरूरत (लघुकथा)

मॉल से दीवाली की ढेर सारी खरीदारी करके जैसे ही कार से गेट के बाहर निकले,एक गुब्बारे बेचने वाला कम उम्र का लड़का दौड़कर आया और गुब्बारे खरीदने की इल्तिज़ा करने लगा।
"अरे नहीं चाहिये भैया !"
"ले लो ना बीबी जी! "
"हां मम्मा ! ले लो ना मुझे चाहिये "
"अरे नहीं बेटा! क्या करोगे?अभी इतने सारे खिलौनें खरीदे है ना।"
"जाओ भैया!हमें जरूरत नहीं ।"उसने झिड़कने के अंदाज में कहा ।
लड़का थोड़ा हताश हुआ और बोला -
"कुछ चीजें जरूरी तो नहीं जब जरूरत हो तभी खरीदी जाए बीबी जी!"
पीछे सीट पर रखे अनाप-शनाप सामान पर एक नजर डाल,लड़के ने कटाक्ष किया और आगे बढ़ गया ।

.
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Rahila on February 24, 2016 at 1:30pm
बहुत शुक्रिया सर जी! आपने अपनी बहुमू।ल्य राय देकर मेरा मार्गदर्शन किया । सादर धन्यवाद ।

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on February 24, 2016 at 10:02am

//"कुछ चीजें जरूरी तो नहीं जब जरूरत हो तभी खरीदी जाए बीबी जी!"//

एक कम उम्र बच्चे के मुँह से ऐसा भारी भरकम संवाद स्वाभाविक नहीं लग रहा राहिला जी, ज़रा गौर फरमाएँI बहरहाल, लघुकथा के भाव बेहद सुंदर हैं जिस हेतु मेरी हार्दिक बधाई प्रेषित हैI    

Comment by Rahila on November 4, 2015 at 9:35pm
बहुत आभार आप सब का । आप सब ने अपना अमूल्य समय दिया मेरी रचना को और बेहद सुन्दर टिप्पणियां दी । बहुत -बहुत आभार ।
Comment by TEJ VEER SINGH on November 4, 2015 at 5:01pm

हार्दिक बधाई आदरणीय राहिला जी!अच्छी लघुकथा!

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 4, 2015 at 12:46pm
बेहतरीन सहज भाव पूर्ण प्रस्तुति हुई है आदरणीया राहिला जी। बहुत बहुत हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ आपको।
Comment by Rahila on November 4, 2015 at 11:15am
बहुत शुक्रिया आदरणीय आबिद साहब !रचना पर सुन्दर टिप्पणी के लिये । बहुत आभार ।
Comment by Rahila on November 4, 2015 at 11:13am
बहुत शुक्रिया प्रिय प्रतिभा दी! आपकी उपस्थित ही मेरे लिये बहुत खुशी की बात है । उस पर हौसला अफज़ाई बड़ी खुशनसीबी मेरी ।बहुत आभार ।
Comment by Rahila on November 4, 2015 at 11:09am
बहुत आभार आदरणीय मिथलेश जी! आपका इतनी बारीकी से रचना का अवलोकन बहुत ही अच्छा लगा।आज महसूस हो रहा है सही मंच पर हूं अपनी हर रचना पर आपका अमूल्य समय चाहूंगी और आपकी टिप्पणियों का इंतेजार रहेगा ।सादर नमन ।
Comment by Abid ali mansoori on November 3, 2015 at 8:54pm

आदरणीया राहिला जी मन को छूती इस लघुकथा के लिए हार्दिक वधाई स्वीकारें!

Comment by pratibha pande on November 3, 2015 at 7:01pm

कटु सत्य कितने सरल शब्दों में बयां कर दिया आपने राहिला जी , शिल्प बढ़िया कसावट लिए है ,बधाई आपको इस उत्तम रचना कर्म के लिए 

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