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मुफ़्त का माल -(लघुकथा )राहिला

पिताजी!उस कमजोर बकरी को जल्दी हृष्ठ-पुष्ट देखने की चाह में स्नेहवश बागीचे से अलग-अलग किस्म की पत्तियां लाकर लगभग जबरन खिलाने की कोशिश कर रहे थे।लेकिन वो ढीठ की बच्ची भूख शांत होने के बाद किसी चींज को मुंह तक ना लगा रही थी।ये देख वे खीज गये और बोले:

"अरी खा ले कम्बख्त!इतने किस्म की पत्तियां मुफ़्त में मिल रही हैं और तू भाव खा रही है ।"
"अजी!गुस्सा क्यों होते हो जी ! मुफ़्त माल है!वो क्या जाने?जानवर है जानवर, इंसान नहीं है "मां कनखियों से देख, छेड़ लेकर बोली।

.
मौलिक एवं अप्रकाशित

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प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on February 24, 2016 at 10:05am

बहुत बढ़िया लघुकथा कही है राहिला जीI लघुकथा की पंच-लाइन तो नॉक आउट कर देने वाली है, पढ़कर आनंद आया, बहुत बहुत बधाईI   

Comment by Rahila on November 14, 2015 at 8:13pm
आदरणीय बैजनाथ शर्मा जी!इतनी उत्साह भरी टिप्पणी के लिये हार्दिक आभार । सादर नमन ।
Comment by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on November 13, 2015 at 2:07pm

आदरणीया राहिला जी .... क्या बात!!!!  इसे कहते हैं .....लघुकथा|  बधाई|

Comment by Rahila on November 12, 2015 at 9:34am
बहुत शुक्रिया हौसला अफज़ाई का आदरणीय आबिद साहब!
Comment by Abid ali mansoori on November 11, 2015 at 7:34pm

सच में बहुत बढ़िया, वधाई आपको!

Comment by Rahila on November 11, 2015 at 1:31pm
आदरणीय विजय जी!,सादर प्रणाम, आपका आशीर्वाद सराहना के रूप में प्राप्त हुआ मेरा लिखना सार्थक हो गया । बहुत शुक्रिया, बहुत आभार ।
Comment by Rahila on November 11, 2015 at 1:23pm
बहुत शुक्रिया आदरणीय सुनील जी! आपको मेरी रचना पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ । मैं तो खुद आपकी लेखनी से बहुत प्रभावित हूं । सादर आभार ।
Comment by vijay nikore on November 11, 2015 at 12:44pm

कुछ ही शब्दों में बहुत कुछ कह दिया है .... तभी तो यह लघु कथा अच्छी बनी है। हार्दिक बधाई।

Comment by Rahila on November 10, 2015 at 3:26pm
आदरणीय मिथलेश जी! आपकी प्रतिक्रिया का बेसब्री से इंतेजार कर रही थी।आपको रचना पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ। बहुत शुक्रिया,बहुत आभार ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on November 10, 2015 at 1:46pm

आदरणीया राहिला जी, मानवीय प्रवृत्ति को उभारती बहुत बढ़िया लघुकथा हुई है. आपने सटीक और सधी शैली में कथ्य के मर्म को शाब्दिक किया है. इस प्रस्तुति पर आपको हार्दिक बधाई 

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