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कोरी शिक्षा (लघु कथा )राहिला

"हां,तो बताओ इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है? "
दादाजी!इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें कभी भी किसी की चीज देखकर ईर्ष्या नहीं करनी चाहिये।बल्कि हमारे पास जो कुछ भी है उसी में संतोष करना चाहिए । "
"शाबाश बेटा! क्योंकि संतोष ही सुख और सुकून की चाबी है । "
तभी -
"अरे आओ -आओ वर्मा जी!कहिये क्या सेवा कर सकता हूं आपकी? "
"बस दो बिस्कुट के पैकेट और एक चाय पत्ती का डिब्बा दे दीजिये । और ये बाहर गुप्ता जी !की दुकान के आगे नई कार खड़ी है ।उन्होनें !ले ली क्या?"
"हां भई!दीवाली ऑफर का फायदा उठाया है ।बस तभी से सबको दिखाता फिर रहा है । आज स्कूटर से नहीं बल्कि मुझे जलाने के लिये इस से आया है । मैं खूब समझता हूं इसकी ओछी मानसिकता ।"कहते -कहते उनका चेहरा ईर्ष्या से विकृत हो गया ।
मौलिक और अप्रकाशित

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Comment by Rahila on November 16, 2015 at 8:58pm
आदरणीय योगराज सर जी एवं आदरणीय सौरभ सर जी,सादर प्रणाम, आपका आशीर्वाद यूं ही मेरे साथ बना रहा तो एक दिन अवश्य आपकी उम्मीदों पर खरी उतरूगीं । मैं हर तरह से बेहतर के लिये प्रयास करूगीं । हौसला अफज़ाई का बेहद शुक्रिया । सादर नमन ।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 16, 2015 at 4:38pm

मैं डिट्टो यही टिप्पणी करने वाला था जो आदरणीय योगराजभाईसाहब ने दिया है. आदरणीया राहिलाजी का अभ्यास बेहतर परिणामों का आकांक्षी है, इसमें संदेह नहीं.

शुभेच्छाएँ


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on November 16, 2015 at 12:03pm

हालाकि कथनी और करनी में अंतर वाला विषय बेहद घिसा-पिटा और उबाऊ हो चुका है फिर भी यह लघुकथा अच्छी  हुई है आ० राहिला जी, लेकिन मुझे लगता है कि यह इससे कहीं बेहतर बन सकती थी I बहरहाल, प्रयासरत एवं अभ्यासरत रहें और मेरी दिली मुबारकबाद स्वीकार करें I 

Comment by Rahila on November 16, 2015 at 8:28am
बहुत आभार आदरणीया राजेश कुमारी जी । सादर नमन ।
Comment by Rahila on November 16, 2015 at 8:27am
बहुत आभार आदरणीया कल्पना दी ।सादर नमन ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 15, 2015 at 11:41pm

ईर्ष्या  विषय पर  सन्देश परक सुन्दर लघु कथा ,हार्दिक बधाई राहिला जी .

Comment by Rahila on November 14, 2015 at 12:51pm
बहुत -बहुत शुक्रिया सभी वरिष्ठ आदरणीय जन, आप सब की प्रोत्साहन भरी टिप्पणियां ही है जिनके कारण लेखन के क्षेत्र में दो -चार कदम चल पाई हूं । आप सब का तहे दिल से बहुत शुक्रिया बहुत आभार । सादर नमन ।
Comment by Omprakash Kshatriya on November 14, 2015 at 7:37am

आदरणीय राहिला जी आप ने बहुत  ही खूबसूरती से ईर्ष्या को परिभाषित कर दिया. बधाई आप को .

Comment by Madan Mohan saxena on November 13, 2015 at 4:54pm

बहु बहुत बधाई

Comment by TEJ VEER SINGH on November 13, 2015 at 11:29am

हार्दिक बधाई आदरणीय राहिला  जी!अच्छा संदेश देती लघुकथा!

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