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मेरी पाँच हाईकू रचनाएं ।

टूटी आशाएं,

बिखरा परिवार,

मैं मिट गया ।। 1 ।।

 

तुम्हारी खुशी,

जीं-तोड़ मेहनत,

फिर भी विफल ।। 2 ।।

 

बहती पवन,

विकराल रूप,

सब कुछ बंजर ।। 3 ।।

 

रब नाऱाज,

लहरो का कहर,

बहते आँसू ।। 4 ।।

 

धुँधली रेखा,

तुम्हारा आगमन,

सूर्य उदय ।। 5 ।।

  

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by DIGVIJAY on December 6, 2015 at 9:20am

बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय लक्ष्मण जी एवं गिरिराज जी ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 6, 2015 at 8:16am

बहुत खूब


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 5, 2015 at 8:34pm

आदरणीय दिग्विजय भाई , आपके सभी हाइकु बहुत सुन्दर लगे , आपको हार्दिक बधाई ।

Comment by DIGVIJAY on December 5, 2015 at 12:45pm

उत्साह बढ़ाने के लिए धन्यवाद । आदरणीय उस्मानी साहब

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on December 5, 2015 at 10:28am
टिप्पणियों सहित हाइकू रचनाएँ बहुत बढ़िया । अगली रचनाओं की प्रतीक्षा के साथ बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय दिग्विजय जी।
Comment by DIGVIJAY on December 4, 2015 at 9:41pm

जीं तो कर रहा हैं कि दोबारा से प्रकाशन हेतु निवेदन करू परन्तु संपादक महोदय को अपनी गलती हेतु क्यों परेशान किया जाए । दोबार से अति उत्साह में जल्दीबाजी न करके ध्यान से पोस्ट करूंगा....

आदरणीय दूसरी पंक्ति में भी कि जगह क्यों लगाने से सही अर्थ के साथ-साथ सहीं शिल्प भी बैठ रहीं है । आपका बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय सुशील जी ।

Comment by Sushil Sarna on December 4, 2015 at 6:35pm

आदरणीय दिग्विजय जी पाँचों हायकू सुंदर बन पड़े हैं ,हार्दिक बधाई।  आदरणीय दुसरे हायकू की तीसरी पंक्ति का गठन कृपया पुनः देख लें ।  

Comment by kanta roy on December 4, 2015 at 6:22pm

अब ये सभी उम्दा बन पड़े है आदरणीय दिग्विजय जी।  बधाई !

Comment by DIGVIJAY on December 4, 2015 at 6:06pm

शायद तीसरे न० के हाइकू के लिए मुझे.....

बहती हवा,

विकराल मंजर,

सब बंजर ।।................और एक सुधार जो हाइकू माँग रहा हैं वो पाँचवे न० का हैं जहाँ सूर्य कि जगह भाग्य उचित लग रहा हैं । सभी साहित्यकारो से माँफी माँगता हूँ अति उत्साह में जल्दी पोस्ट कर बैठा । बाकी गुणीजनो का सुझाव सर आँखो पर । सादर

Comment by DIGVIJAY on December 4, 2015 at 5:58pm

ओह....इस ओर तो मेरा ध्यान ही नहीं गया ये सब जल्दबाजी का नतीजा हैं माफी चाहता....जल्द ही इसका व्यवस्थित रूप लेकर उपस्थित होता हूँ । प्रशंसा हेतु धन्यवाद आदरणीया कान्ता दीदी ।

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