For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

क्यूं ये` तक़दीर मेरी उलझती रही। (ग़ज़ल )

मापनी - 212 212 212 212
========================================
 
क्यूं ये` तक़दीर मेरी उलझती रही।
ज़िन्दगी रात दिन खूब जलती रही।
 
रास्ते गुम हुए मंज़िलें लापता,
बस थकन मेरी` हरसू भटकती रही।।
 
दिल में` साजन के आने की चाहत लिए,
सामने आइने के संवरती रही ।।
 
मेरी` तक़दीर भी जैसे` अंगार हो,
जेठ की दोपहर सी ही` तपती रही ।।
 
ढल गयी रात बेटा नहीं आया` घर।
फ़िक्र माँ की लगातार बढ़ती रही।।
 
मौत का ख़ौफ़ उसको डराता भी`क्या |
आखिरी साँस तक खूब लड़ती रही।।
 
ये मुहब्बत नहीं छोड़े` पीछा मे`रा।
याद सीने से` आ कर लिपटती रही।।
 
-----आलोक `उदित`------
----रायपुर--- (C, G.)

Views: 643

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Alok Mittal on February 3, 2016 at 4:00pm

आद. Hari Prakash Dubey जी...शुक्रगुजार हूँ आपका तहे दिल से आपने मेरा मान बढ़ाया ...कृपया स्नेह बनायें रखियेगा

Comment by Alok Mittal on February 3, 2016 at 3:57pm

आद. Samar kabeer जी आपका बहुत बहुत आभार ..भूल वश रह गया ...याद दिलाने का आपका बहुत आभार


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on February 3, 2016 at 2:19pm

अलग अलग परिस्थितियों और मनःस्थितियो पर सुन्दर अशआर कहे हैं 

बधाई

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 3, 2016 at 12:20am

बहुत खूब हार्दिक बधाई l

Comment by जयनित कुमार मेहता on February 2, 2016 at 6:32pm
वाह! बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही आपने आदरणीय आलोक मित्तल जी!!
Comment by Hari Prakash Dubey on February 2, 2016 at 1:28am

मेरी` तक़दीर भी जैसे` अंगार हो,

जेठ की दोपहर सी ही` तपती रही...वाह ! इस सुन्दर रचना पर बधाई आपको आ. आलोक मित्तल जी ! सादर 

Comment by Samar kabeer on February 1, 2016 at 11:07pm
जनाब अलोक जी,आदाब,अच्छी ग़ज़ल से नवाज़ा है आपने मंच को,मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाऐं ।
ग़ज़ल के नीचे आपने मौलिक/अप्रकाशित नहीं लिखा है ?

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
3 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
1 hour ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
yesterday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
yesterday
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
Monday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
Monday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
Monday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रबंधन समिति से आग्रह है कि इस पोस्ट का लिंक उस ब्लॉक में डाल दें जिसमें कैलंडर डाला जाता है। हो…"
Monday
आशीष यादव posted a blog post

गन्ने की खोई

पाँच सालों की उम्र,एक लोहे के कोल्हू में दबी हुई है।दो चमकदार धूर्त पत्थर (आंखें) हमें घुमा रहे…See More
Monday
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत अच्छे दोहे रचे गए हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service