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मॉ की दवा – ( लघुकथा )

"राजू बेटा, क्या कर रहा है! मेरी दवा खत्म हो गयी है! मेरी डायरी ले जा और मेरी दवाइंयॉ ले आ"!

"मॉ, आज क्लब में हम लोग मदर्स डे मना रहे हैं! मुझे क्लब का सैक्रेटरी होने के नाते मदर्स डे के ऊपर एक भाषण देना है! अपनी सोसाइटी में काम करने वाली बाइयों एवम अन्य महिला कर्मचारियों को वस्त्र, मिठाईयां और दबाईयां वितरण करनी हैं! अतःउसी की रूप रेखा तैयार कर रहा हूं! आज तो बहुत मुश्किल है! "!

“तो बेटा ऐसा कर कि उसी महिलाओं की लिस्ट में मेरा भी नाम लिख ले”!

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by TEJ VEER SINGH on May 17, 2016 at 5:10pm

हार्दिक आभार आदरणीय जान गोरखपुरी जी!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on May 16, 2016 at 10:05pm
बेहतरीन लघुकथा..हार्दिक बधाई आ.तेजवीर जी।
Comment by TEJ VEER SINGH on May 16, 2016 at 12:49pm

हार्दिक आभार आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब जी!

Comment by TEJ VEER SINGH on May 16, 2016 at 12:49pm

हार्दिक आभार आदरणीय सतविंदर जी!

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on May 15, 2016 at 9:31pm

मोहतरम जनाब तेज वीर साहिब ,बहुत अच्छा सन्देश देती लघु कथा के लिए मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on May 15, 2016 at 4:21pm
वाह्ह्ह्ह्!सुंदर क्ताक्षयुक्त लघुकथा हुई है।हार्दिक बधाई आदरणीय तेजवीर सिंह जी।
Comment by TEJ VEER SINGH on May 15, 2016 at 12:27pm

हार्दिक आभार आदरणीय राहिला आसिफ़ जी!

Comment by TEJ VEER SINGH on May 15, 2016 at 12:26pm

हार्दिक आभार आदरणीय मीना पाठक जी!

Comment by TEJ VEER SINGH on May 15, 2016 at 12:25pm

हार्दिक आभार आदरणीय शेख उस्मानी जी!

Comment by Rahila on May 15, 2016 at 7:41am
वाह. .बहुत शानदार कटाक्ष, दिखावे दुनिया है जिसमें हक़ीकत की कोई जगह नहीं । बहुत उम्दा ।बहुत बधाई आपको । सादर नमन

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