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सच की औक़ात (लघुकथा) / शेख़ शहज़ाद उस्मानी

बिना कोई ख़ास सफलता हासिल किए हुए भी 'सच' सदैव ख़ुद पर अभिमान कर रहा था। 'झूठ' के सामने वह हमेशा की तरह अपने ही गुणगान करते हुए बोला- "मैं हूं न ! सब समस्याओं का समाधान चुटकियों में करवा देता हूँ! जिसने मुझे समझा और अपनाया वह धन्य हो गया और महान कहलाया!"
'झूठ' जो पहले उसकी बचकानी बातें सुनकर मुस्करा रहा था, अब ठहाके मारकर हँसने लगा।
"अरे, इतना ही सुनकर ख़ुश होने लगे, अभी और भी तो सुनो!" - 'सच' ने शेख़ी मारते हुए कहा-" पुलिस विभाग हो या न्यायालय, परिवार हो या दुकान, उत्पाद हो या उसका विज्ञापन सब जगह मैं मौजूद तो रहता हूँ, लेकिन चुप रहते हुए बिना बोली लगाये मैं लोगों को ऊंचे दाम दिला देता हूँ, कभी बिक जाता हूँ, कभी किसी को बिकवा देता हूँ!"
'झूठ' फिर अपनी हँसी नहीं रोक सका । ठहाका मारते हुए उसने कहा- "बस अब चुप भी हो जा, क्यों मुझे शर्मिन्दा कर रहे हो? मुझे मालूम है आजकल तेरी औक़ात है क्या?"

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by Sheikh Shahzad Usmani on June 24, 2016 at 1:55am
रचना-पटल पर समय देकर विषयांतर्गत अपने बेहतरीन विचार साझा करते हुए स्नेहिल प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए हृदयतल से बहुत बहुत शुक्रिया मोहतरम जनाब सुशील सरना जी, जनाब राजेन्द्र कुमार दुबे जी और मोहतरम जनाब डॉ. विजय शंकर जी व जनाब डॉ. आशुतोष मिश्रा जी।
Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 23, 2016 at 4:40pm

आदरणीय उस्मानी जी ..सच की वाकई में ये हालत है ..इस सार्थक रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

Comment by Dr. Vijai Shanker on June 22, 2016 at 6:37pm
सच की विडम्बना यह है कि वह जहां भी होता है अकेला होता है। जब कि एक झूठ के साथ, समर्थन और सहयोग में हमेशा सौ झूठ खड़े होते हैं , अब जब सबकुछ आंकड़ों पर ही निर्भर करता है तो झूठ को हमेशा समर्थन, सहयोग, साथ और बहुमत मिल जाता है।
इस सुन्दर अर्थपूर्ण प्रस्तुति पर बधाई , आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी जी , सादर।
Comment by Rajendra kumar dubey on June 22, 2016 at 1:48pm
वास्तव में आज सत्य की कोई औक़ात दिखाई नही देती पर बेशक सत्य की ताकत से इनकार नहीं किया जा सकता श्।एक अच्छी कहानी के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय उस्मानी जी।
Comment by Sushil Sarna on June 22, 2016 at 1:38pm

अादरणीय उस्मानी साहिब सच की दुर्दशा प र अपने सार्थक कटाक्ष किया है।  इस सुंदर लघुकथा की प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई। 

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