For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गजल(आहटों से डर रहा....)

2122 2122 212
आहटों से डर रहा वह अाजकल
चाहतों का बस हुआ वह आजकल।1

फूल को समझा रहा है असलियत
सुरभियों को डँस रहा वह अाजकल।2

शब्द मय चुभते नुकीले दुर्ग में
राह भूला,है फँसा वह अाजकल।3

बात की गहराइयाँ समझे बिना
तंज बेढब कस खड़ा वह आजकल।4

रोशनी की चाह में खुद को भुला
हो गया है अलबला वह अाजकल।5

आदमी लगता कभी सुलझा हुआ
फिर लगा खुद ही ठगा वह अाजकल।6

चादरें हैं श्वेत सबको क्या पता
काजलों में है रँगा वह अाजकल।7

नींद में चलता हुआ लगता मुआ
लाख हो पर कब जगा वह अाजकल।8

मलहमों से घाव कुछ भरता नहीं
रंजिशों का है घड़ा वह आजकल।9
मौलिक व अप्रकाशित@मनन

Views: 596

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Manan Kumar singh on July 2, 2016 at 9:11am
आभार आपका गिरिराज भाई, देखता हूँ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 2, 2016 at 8:36am

आदरणीय मनन भाई , अच्छी गज़ल कही है , हार्दिक बधाइयाँ । एक  '' है '' की कमी मिसरों मे लगती है , देखियेगा ।

शब्द मय चुभते नुकीले दुर्ग में
राह भूला फँस चला वह अाजकल।    -- राह भूले , हैं फँसा वह आजकल   --- बात कुछ साफ आयेगी

ऐसे ही कुछ सुधार की संभावनाये मिसरों मे हैं  अभी - सोच लीजियेगा

 

Comment by Manan Kumar singh on July 1, 2016 at 11:11pm
बहुत बहुत आभार आदरणीया।
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on July 1, 2016 at 8:37pm

चादरें हैं श्वेत सबको क्या पता
काजलों में है रँगा वह अाजकल।7

बहुत खूब आदरणीय | 

Comment by Manan Kumar singh on July 1, 2016 at 8:32pm
आभार नीलेश जी आपका।
Comment by Manan Kumar singh on July 1, 2016 at 8:31pm
आभार आदरणीय सुशील जी।
Comment by Nilesh Shevgaonkar on July 1, 2016 at 7:42pm

अच्छा प्रयास है .. अमूमन एक "है" की कमी खल रही है .. 
मसलन 
.
आहटों से डर रहा है अाजकल
चाहतों का हो गया है आजकल
.
फूल को समझा रहा है असलियत
सुरभियों को डँस रहा है अाजकल।

Comment by Sushil Sarna on July 1, 2016 at 3:11pm

आहटों से डर रहा वह अाजकल
चाहतों का बस हुआ वह आजकल।1

फूल को समझा रहा है असलियत
सुरभियों को डँस रहा वह अाजकल।2

वाह अादरणीय मनन कुमार जी खूबसूरत अहसासों की इस दिलकश ग़ज़ल के लिए दिल से बधाई स्वीकार करें।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, प्रस्तुत दोहों की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर"
8 minutes ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय जयहिंद रायपुरी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर आपने  दोहा छंद रचने का सुन्दर प्रयास किया है।…"
10 minutes ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  सही कहना है हम भारतीय और विशेषकर जो अभावों में पलकर बड़े हुए हैं, हर…"
42 minutes ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी हार्दिक धन्यवाद आभार आपका"
49 minutes ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  हार्दिक धन्यवाद आभार आपका।"
50 minutes ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर मेरी प्रस्तुति की सराहना के लिए आपका हार्दिक…"
1 hour ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"    आदरणीया प्रतिभा पाण्डे जी सादर, प्रस्तुत दोहों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार ।…"
1 hour ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"किल्लत सारे देश में, नहीं गैस की यार नालियाँ बजबजा रही, हर घर औ हर द्वार गैस नहीं तो क्या हुआ, लोग…"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। दोहों पर आपकी विस्तृत टिप्पणी और सुझाव के लिए हार्दिक…"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. प्रतिभा बहन, सादर अभिवादन। चित्रानुरूप सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
3 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"*पका न पाती  रोटियाँ, भले  युद्ध की आगजला रही है नित्य पर, वह निर्धन का…"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त चित्रानुरूपसुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
3 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service