For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

लघु कविता :- माँ

माँ !
देखा तो होगा तुझे
पर चेहरा याद नहीं
न ही तेरी तस्वीर कोई मेरे पास
सुना भी होगा तुझे
पर शब्द याद नहीं
हां याद है हर पल मेरे साथ
चलता तेरा साया
जिससे लिपट कर कई रातों को रोया हूँ मैं
माँ तेरे लिये !!
(अभिनव अरुण )

Views: 2449

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Abhinav Arun on May 10, 2011 at 3:20pm
टिप्पणी के लिए आभारी हूँ श्री सौरभ जी |साथ ही सर्वश्री संजय जी ,और  गुरूजी  आप  का  भी  हार्दिक  आभार  | टिप्पणी  रचना  के गंभीर  पठन  की  प्रतीक  है  | शुक्रिया  | 
 

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 10, 2011 at 2:48pm

".. .. कई रातों को रोया हूँ मैं / माँ तेरे लिये!!.."

कोमलतम भावों के निश्शब्द स्वरूप के प्रति श्रेयस्कर होगा मैं कोई स्वर न दूँ.  एक के ’न होने’  का उत्कट भान उसके ’न होने’ की तासीर बहुगुणित कर देती है..  आभार.

Comment by Sanjay Rajendraprasad Yadav on May 10, 2011 at 2:14pm
" दिल की गहराईयों से आप को बहुत-बहुत धन्यवाद ,
// आप की यह एक छोटी सी रचाना इस बहुत बड़े ह्रदय के साग़र में भावनाओं का एक बहुत बड़ा त्सुनामी ला दिया......................................
Comment by Rash Bihari Ravi on May 10, 2011 at 1:42pm
मन की गहराई तक समा जाने वाली कृति बहुत बढ़िया सर जी ,
Comment by Abhinav Arun on May 10, 2011 at 1:36pm

नियति और यथार्थ को स्वर देती ये मेरी रचना आप सबको पसंद आयी आभारी हूँ | श्री बागी जी , धीरज जी, वीरेंदर जी और इस्मत जैदी जी आप सबका तहे दिल से शुक्रिया |

Comment by Dheeraj on May 10, 2011 at 12:38pm
मार्मिक रचना अरुण जी, ह्रदय में टीस और आँखों में नमी उतर आई. सदर नमन है इस शब्द  "माँ" और आपके लेखनी को
Comment by Veerendra Jain on May 10, 2011 at 12:33pm

हां याद है हर पल मेरे साथ
चलता तेरा साया
जिससे लिपट कर कई रातों को रोया हूँ मैं
माँ तेरे लिये !!

 

bahut hi behatarin ..Arunji...bahut bahut badhai aapko ..is bhavparak rachna ke liye...

Comment by ismat zaidi on May 10, 2011 at 12:23pm
man ko chhootee huee rachna

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 10, 2011 at 11:55am
सीधे ह्रदय को बेधने वाली रचना, बहुत ही सुंदर अरुण भाई सच मानिए "घाव करे गंभीर" वाली बात है इस रचना में | आपके लेखनी को वंदन है |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास
"आ. भाई मनोज जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई । कुछ टंकण त्रुटियाँ हैं देखियेगा ।"
1 hour ago
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल : मनोज अहसास

1222  1222  122ज़माने भर में जितने हादसे हैं.हमें ख़ामोश होकर देखने हैं.किसी को चलने में दिक़्क़त न…See More
1 hour ago
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post रिमझिम - रिमझिम बदरा बरसे
"आदाब , आ0 ,आपको  प्रस्तुति सुन्दर लगी , जान कर प्रसन्नता हुई । हार्दिक धन्यवाद आपको"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post पीड़ा के दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई विजय शंकर जी, सादर अभिवादन । दोहों पर उपस्थिति, स्नेह व प्रशंसा के लिए हार्दिक आभार ।"
1 hour ago
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post केंचुआ(लघुकथा)
"आभार आदरणीय विजय शंकर जी।"
2 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on Manan Kumar singh's blog post केंचुआ(लघुकथा)
"बहुत गहरी और सामयिक गंभीर लघु - कथा , बहुत बहुत बधाई , आदरणीय मनन कुमार सिंह जी , सादर।"
2 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post पीड़ा के दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आँसू अपने डाल दो, उस आँचल में औरहर दुख पर जो नित करे, माँ के जैसा गौर।६।आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर…"
2 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post हिसाब-किताब— डॉO विजय शंकर।
"आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी , रचना पर आपकी उपस्थिति के लिए आभार , बधाई के लिए धन्यवाद , सादर।"
3 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post हिसाब-किताब— डॉO विजय शंकर।
"आदरणीय रवि भसीन शाहिद जी , रचना को स्वीकृति प्रदान करने के लिए आभार , मुबारकबाद के लिए धन्यवाद ,…"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post बारिश पर चंद दोहे :
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन, सुन्दर दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई ।"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post चीन के नाम (नज़्म - शाहिद फ़िरोज़पुरी)
"आ. भाई रवि भसीन जी, सादर अभिवादन । इस अति उत्तम रचना के लिए ढेरों बधाइयाँ ।"
4 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post चीन के नाम (नज़्म - शाहिद फ़िरोज़पुरी)
"मुहतरम जनाब रवि भसीन 'शाहिद' जी। इस ज़बरदस्त प्रस्तुति और  जज़्बे के लिए आपको सलाम…"
11 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service