For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

नव गीत.....
बेला महका.......


बेला महका चम्पा महकी
महकी है कचनार
झूम रहीं सब काकी बहनें
नृृत्य करें हर बार।

गाँव में शादी है होली
फूलों से सजती है डोली
संबन्धी ने भेजा न्योता
गाँव मेरे अब क्यों ना आता
बातों की भर मार।

रात रात भर बेला जागा
खिल न सका वह कहीं अभागा
कहीं गुंथ गया गजरे अन्दर
समझ रहा वह तुझे सिकन्दर
नहीं पा सकी पार।

बचपन बीता यौवन आया
शैतानी ने कदम बढ़ाया
तंत्र मंत्र और जादू टोना
मेज पोश का फटा है कोना
सब कुछ है बेकार|

तितली ने हैं पंख हिलाये
गौरैया ने पांव बढ़ाये
इस टहनी से उस टहनी तक
उस टहनी से इस टहनी तक
दौड़ रही हर बार।

आभा

अप्रकाशित एवं मौलिक 

Views: 789

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Abha saxena Doonwi on August 22, 2016 at 10:12pm

आदरणीय  Vijay Nikore sb जी नमस्कार ,आपकी प्रतिक्रिया पा कर मैं बहुत प्रसन्न हूँ शुक्रिया  आपका ...

Comment by vijay nikore on August 22, 2016 at 4:07pm

अति सुन्दर नवगीत। हार्दिक बधाई।

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on August 10, 2016 at 5:41pm
बहुत् सुन्दर नवगीत,हार्दिक बधाई आदरणीया आभा जी।
Comment by Samar kabeer on July 24, 2016 at 11:57pm
मोहतरमा आभा जी आदाब,बहुत सुंदर नवगीत रचा है, बधाई स्वीकार करें,बाक़ी ,जनाब रामबली गुप्ता जी बता ही चुके हैं ।
Comment by pratibha pande on July 22, 2016 at 8:00pm

बचपन बीता यौवन आया
शैतानी ने कदम बढ़ाया
तंत्र मंत्र और जादू टोना
मेज पोश का फटा है कोना
सब कुछ है बेकार|.....वाह  क्या अल्हड़ भाव हैं  ...हार्दिक बधाई प्रेषित है आदरणीया  

Comment by Abha saxena Doonwi on July 22, 2016 at 7:05pm

आदरणीय राम बली गुप्ता जी नमस्कार , पहले तो  मैं  आपका धन्यवाद अदा करना चाहती  हूँ कि जो आपने मेरे इस नव गीत को इतने ध्यान से पढ़ा ...आपके  सभी  सुझाव उचित लगे  हैं  मुझे  ....  सुधार कर  लिया है  मैंने ...शुक्रिया  आपका ...

Comment by रामबली गुप्ता on July 22, 2016 at 11:16am
टंकण त्रुटि

*उड़ती बारम्बार*
Comment by रामबली गुप्ता on July 22, 2016 at 11:13am
आदरेया आभा जी बहुत ही सुंदर गीत रचा है आपने। हृदय से बधाई स्वीकारें। कुछेक स्थानों पर मुझे प्रवाह में अटकाव लगा। सुझाव निम्न हैं यदि आपके भावों के अनुकूल लगें तो विचार करियेगा।
1-शायद चम्पा स्त्रीलिंग है अतः प्रथम लाइन को * बेला-जूही-चम्पा महकी* प्रकार करके देखें।
2- *गांव में शादी है होली* लाइन में अटकाव है। *में* मे मात्रा पतन करना पड़ रहा है।
3-बेला स्त्रीलिंग है अतः *जागा* को *जागी* तथा *अभागा* को *अभागी* कर लीजिये।
4-*कहीं गुंथ गया गजरे अंदर* लाइन मे अटकाव है। इसे * कहीं गुँथा गजरे के अन्दर* प्रकार करके देकहिये। इसी प्रकार *तन्त्र-मन्त्र और जादू-टोना* में भी अटकाव है। इसे *तंत्र-मंत्र औ जादू-टोना* करके देखिए।
4-*हर बार* को दो जगह समान अर्थों में तुकांत के लिए प्रयुक्त किया गया है। इससे पुनरुक्ति दोष हो रहा है। अंतिम लाइन में *दौड़ रही हर बार* के स्थान पर उड़ाती बारम्बार* करके देखिए। पुनरुक्ति दोष दूर हो जायेगा।

उपर्युक्त के संदर्भ में अन्य सुधीजन भी विचारें। हो सकता है मैं गलत होवूं।

बाकी सब शुभ-शुभ

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Monday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Apr 3
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Apr 3
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
Mar 31
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, बिना सोचे बोलने के परिणाम पर सुन्दर और संतुलित लघुकथा…"
Mar 31

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service