For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

1222,1222,1222,1222

कभी छाया मिली गहरी ,कभी फिर धूप पड़ती है
चले जीवन सही साथी,नहीं मुश्किल अकड़ती है

जमाना ये उसे चाहे दुखों को जो भुलाता है
सतत बढ़ता चला जाए नहीं खुद को रुलाता है
मुसीबत को बहुत छोटी,समझ कर जो चला जाए
खुदा देखो उसे ही तो ज़माने में सदा लाए
नहीं तो देख लो कितनी यहाँ पर उम्र झड़ती है
चले जीवन सही साथी,नहीं मुश्किल अकड़ती है।1।

मुहब्बत एक प्यारा सा ख़ुशी का ही खज़ाना है
इसी को पास रखकर ही हमें जीवन बिताना है
तुझे बस पास ही देखूँ हमेशा साथ ही पाऊँ
चलूँ जब छोड़ दुनिया को यही इक आस मैं लाऊँ
मुहब्बत हो सलामत तो,दुखों से देख लड़ती है
चले जीवन सही साथी,नहीं मुश्किल अकड़ती है।2।

नहीं होती कभी कोई सही ही जिंदगी उनकी
डरों के साथ रहती है सदा ही बन्दगी जिनकी
जिए जाते वही बस शान से जो हैं नहीं डरते
अमरता ही उन्हें मिलती दिलों में वे नहीं मरते
हुए काबिल जगति ये मनों में मान गढ़ती है
चले जीवन सही साथी,नहीं मुश्किल अकड़ती हैै।3।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 811

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on August 6, 2016 at 4:53pm
आदरणीय सुशील सरना। जी प्रोत्साहन के लिए सदर हार्दिक आभार संग नमन।
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on August 6, 2016 at 4:51pm
प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत आभार आदरणीया कल्पना दीदी।
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on August 6, 2016 at 4:49pm
सादरश्रद्धेय सौरभ पांडेय जी आपका प्रयास पर उपस्थित होकर प्रोत्साहित करना सदैव ऊर्जा प्रद है।सादर हार्दिक आभार।कमियों पर पार पाने का समुचित प्रयास करूँगा।सादर नमन
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on August 6, 2016 at 4:47pm
आदरणीय गिरिराज भंडारी जी प्रोत्साहन एवं मार्गदर्शन के लिए सादर हार्दिक आभार संग नमन।मैं त्रुटियों पर पार पाने का समुचित प्रयास करूँगा।सादर

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 6, 2016 at 1:54pm

आदरणीय सतविन्द्र जी, आपकी रचना प्रक्रिया और तदनुरूप अभ्यास वाकई प्रभावकारी है. यह प्रयास बना रहे. आदरणीय समर साहब के कहे से मैं भी सहमत हूँ. उक्त पंक्तियों को देख लीजियेगा. 

लगन लगी रहे, अभ्यासकर्म बना रहे.. शुभेच्छाएँ 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 6, 2016 at 9:51am

आदरणीय विधाता छंद मे अच्छी रचना हुई है , बधाई आपको ।
निम्न को जाँच लीजियेगा ।
संग - की मात्रिकता ?
नहीं होती है कभी कोई सही सी जिंदगी उनकी ----  इस पंक्ति की मात्रिकता

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on August 5, 2016 at 11:00pm
अनुमोदन,प्रोत्साहन व मार्गदर्शन के लिए सादर हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर जी।नमन
Comment by Sushil Sarna on August 5, 2016 at 7:27pm

 बहुत सुंदर और भावपूर्ण प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय। 

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on August 5, 2016 at 4:58pm
अच्छा प्रयास आदरणीय सतविंदर भैया । बधाई।
Comment by Samar kabeer on August 5, 2016 at 3:27pm
जनाब सतविंदर कुमार जी आदाब,बहुत अच्चा गीत रचा है आपने बधाई स्वीकार करे ।
दूसरे बन्द का पांचवां मिसरा और तीसरे बन्द का पहला मिसरा लय में नहीं लगता कृपया देखिएगा ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
yesterday
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Aug 3
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service