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प्रजातंत्र के देश में, परिवारों का राज

वंशवाद की चौकड़ी, बन बैठे अधिराज |

वंशवाद की बेल अब, फैली सारा देश

परदेशी हम देश में, लगता है परदेश  |

लोकतंत्र को हर लिये, मिलकर नेता लोग

हर पद पर बैठा दिये, अपने अपने लोग |

हिला दिया बुनियाद को, आज़ादी के बाद

अंग्रेज भी किये नहीं,  तू सुन अंतर्नाद |

संविधान की आड़ में, करते भ्रष्टाचार

स्वार्थ हेतु नेता सभी, विसरे सब इकरार |

बना कर लोकतंत्र को, खुद की अपनी ढाल

लूट रहे नेता सकल, जनता का सब माल |

हर पद पर परिवार के, सदस्य विराजमान

विनाश क्या होगा कभी, रक्तबीज संतान ?

प्रजा करे अब फैसला, करे साफ़ परिवार

जनता से मंत्री बने, मिले राज अधिकार |

मौलिक व् अप्रकाशित 

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Comment

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Comment by Kalipad Prasad Mandal on September 14, 2016 at 11:33pm

आदरणीय रामबली  जी !

पंचकल शब्दों की बनावट तीन प्रकार से हो सकती है 122,221 या 212 के रूप में। यदि कोई पंचकल शब्द की बनावट 122 प्रकार की होगी तो त्रिकल या एकमात्रिक शब्द उक्त पंचकल शब्द के पूर्व रखना चाहिए। इसी प्रकार 221 प्रकार के पंचकल शब्द के पश्चात त्रिकल या एकमात्रिक शब्द रखे जाने चाहिए। किन्तु 212 प्रकार के पंचकल शब्दों में त्रिकल या एकमात्रिक शब्द पूर्व या पश्चात कहीं भी रख सकते हैं प्रवाह ठीक होगा। इसी प्रकार त्रिकल शब्दों को लेकर कलों के संयोजन में भी ध्यान दिया जाना चाहिए।---आपकी यह बात तो मेरी समझ मे आ गई , शायद गेयता की समस्या अब दूर हो जाय |

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"अंग्रेज भी किये नही"
में देखने में तो 13 मात्रा अवश्य है किन्तु शब्द-कलों की व्यवस्था दुरुस्त नही है। जिसके कारण गेयता में अटकाव है। अंग्रेज एक पंचकल(221) शब्द है इसके बाद कोई त्रिकल या एकमात्रिक शब्द रखने पर प्रवाह सही होता।
अंग्रेज को मैंने २२१ लिया है |आपके अनुसार इसको " अंग्रेज किये तो नहीं "  २२/१ १२ /२१/२ ठीक होगा ?

इसी प्रकार-
"बना कर लोकतंत्र को" में भी गेयता भंग है और कारण वही शब्द-कलों की दुर्व्यवस्था ही है। 'बना' त्रिकल शब्द है इसके बाद त्रिकल या एकमात्रिक शब्द रखा जाना ही बेहतर होगा।सादर
"बना कर लोकतंत्र को"- यहाँ 'बना, 'लोक' 'तंत्र ' तीन त्रिकल शब्द है इसीलिए  किसी दो के बीच में एक द्विकल शब्द आयगा ही पहले मैंने लिखा था "अब लोक तंत्र को बना, खुद की अपनी ढाल " यहाँ भी 'तंत्र' और 'बना' के बीच में 'को' है| इसका समाधान केवल इसी से हो सकता है कि "कर ' और 'को' के बदले कोई चतुश्कल शब्द मिले जिसका अर्थ भी फिट हो |
सादर  
 
Comment by Kalipad Prasad Mandal on September 14, 2016 at 10:29pm

आदरणीय सुरेश कुमार जी ,आपका हार्दिक आभार |

सादर 

Comment by रामबली गुप्ता on September 14, 2016 at 10:22pm
पंचकल शब्दों की बनावट तीन प्रकार से हो सकती है 122,221 या 212 के रूप में। यदि कोई पंचकल शब्द की बनावट 122 प्रकार की होगी तो त्रिकल या एकमात्रिक शब्द उक्त पंचकल शब्द के पूर्व रखना चाहिए। इसी प्रकार 221 प्रकार के पंचकल शब्द के पश्चात त्रिकल या एकमात्रिक शब्द रखे जाने चाहिए। किन्तु 212 प्रकार के पंचकल शब्दों में त्रिकल या एकमात्रिक शब्द पूर्व या पश्चात कहीं भी रख सकते हैं प्रवाह ठीक होगा। इसी प्रकार त्रिकल शब्दों को लेकर कलों के संयोजन में भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

उपर्युक्त बातें मेरे व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित हैं संभव मैं गलत भी होऊं।सादर
Comment by रामबली गुप्ता on September 14, 2016 at 9:56pm
यदि सिर्फ शिल्प के दृष्टिकोण से देखें तो-
"अंग्रेज भी किये नही"
में देखने में तो 13 मात्रा अवश्य है किन्तु शब्द-कलों की व्यवस्था दुरुस्त नही है। जिसके कारण गेयता में अटकाव है। अंग्रेज एक पंचकल(221) शब्द है इसके बाद कोई त्रिकल या एकमात्रिक शब्द रखने पर प्रवाह सही होता।
इसी प्रकार-
"बना कर लोकतंत्र को" में भी गेयता भंग है और कारण वही शब्द-कलों की दुर्व्यवस्था ही है। 'बना' त्रिकल शब्द है इसके बाद त्रिकल या एकमात्रिक शब्द रखा जाना ही बेहतर होगा।सादर
Comment by ram shiromani pathak on September 14, 2016 at 8:59pm
प्रजातंत्र के देश में, परिवारों का राज
वंशवाद की चौकड़ी, बन बैठे अधिराज।।

वंशवाद की बेल अब, फैली सारा देश
परदेशी हम देश में, लगता है परदेश।।यहाँ कात्य स्पष्ट नहीं

लोकतंत्र को हर लिये, मिलकर नेता लोग
हर पद पर बैठा दिये, अपने अपने लोग।।इसे और अच्छे तरीके से कहा जा सकता है

हिला दिया बुनियाद को, आज़ादी के बाद
अंग्रेज भी किये नहीं, तू सुन अंतर्नाद।।यहाँ भी गड़बड़ है

संविधान की आड़ में, करते भ्रष्टाचार
स्वार्थ हेतु नेता सभी, विसरे सब इकरार।।संविधान की आड़ में??

बना कर लोकतंत्र को, खुद की अपनी ढाल
लूट रहे नेता सकल, जनता का सब माल।गेयता भांग है 1 पद

हर पद पर परिवार के, सदस्य विराजमान
विनाश क्या होगा कभी, रक्तबीज संतान।यहाँ भी वही दोष

प्रजा करे अब फैसला, करे साफ़ परिवार
जनता से मंत्री बने, मिले राज अधिकार।ये दोहा ही गलत है

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on September 14, 2016 at 8:43pm

भाई राम शिरोमणि जी, किसी ने आदरणीय कालीपद जी के दोहों केशिल्प पक्ष पर कुछ नहीं कहा है. चर्चा अन्यान्य विन्दुओं पर हुई है. आप इनके शिल्प पक्ष पर अपने विन्दु रखें. 

Comment by रामबली गुप्ता on September 14, 2016 at 8:37pm
हमारे कहे को मान देने के लिए आद0 सौरभ सर एवं आद0 सुरेश भाई जी आप दोनों का आभार।
Comment by ram shiromani pathak on September 14, 2016 at 8:34pm
सुन्दर दोहे आदरणीय।बधाई आपको
शिल्प कथ्य व् गेयता पर गुणीजनों ने कह दिया है।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on September 14, 2016 at 8:18pm

आदरणीय कालीपद जी, आपकी  प्रस्तुति पर हृदयतल से धन्यवाद और शुभकामनाएँ . मैं इन दोहों के शिल्प पर बाद में आता हूँ. यह् आधिक आवश्यक भी है. लेकिन पहले दोहे की प्रकृति पर मैं पुनः कह दूँ कि भाई रामबली के कहे पर ग़ौर कीजिये. उन्होंने वही कुछ कहा है जो दोहे छन्द की प्रकृति के अनुसार सही है. मंच पर आयोजनों में भी मैं इस विन्दु पर कई-कई दफ़े कह चुका हूँ, कहता आ रहा हूँ.

इस परिप्रेक्ष्य आपकी कोई दलील अमान्य ही होगी, आदरणीय. क्योंकि आप जो कुछ कह रहे हैं वह अपनी समझ के अनुसार कह रहे हैं. मुसलसल ग़ज़ल से दोहा की तुलना न करना ही उचित होगा.
सादर

Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on September 14, 2016 at 7:55pm
आदरणीय श्री कालीपद जी सुन्दर एवं भावप्रद दोहों के लिए हार्दिक बधाई । बाकी आदरणीय रामबली गुप्ता जी ने जो कहा है उस पर भी ध्यान दें सादर

कृपया ध्यान दे...

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