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हिंदी सभ्यता मूल पुरातन भाषा है
संस्कृति के जीवित रहने की आशा है
एक चिरंतन अभिव्यक्ति का साधन है
भारत माता का अविरल आराधन है

हिंदी पावनता का एक उदाहरण है
मातृभूमि की अखंडता का कारण है
उत्तर से दक्षिण पूरब से पश्चिम तक
सारी बोलीं हिंदी माता की चारण हैं

हिंदी सरस्वती, दुर्गा माँ काली है
संस्कृति की पोषक माँ एक निराली है
पूरब में उगते सूरज की आभा है
पश्चिम में छिपते सूरज की लाली है

जन मन की अभिव्यक्ति की परिभाषा है
मनीषियों की आतुर ज्ञान पिपाशा है
जिज्ञासु मानवता की जिज्ञासा है
हिंदी भाषण ही मेरी अभिलाषा है

मौलिक एवम अप्रकाशित
- आदित्य राणा

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Comment by Ashok Kumar Raktale on September 18, 2016 at 11:29pm

हिंदी सरस्वती, दुर्गा माँ काली है
संस्कृति की पोषक माँ एक निराली है
पूरब में उगते सूरज की आभा है
पश्चिम में छिपते सूरज की लाली है........वाह ! बहुत सुंदर भावपूर्ण.

आदरणीय आदित्य कुमार जी सादर, सुंदर रचना हुई है. बहुत-बहुत बधाई. सादर.

Comment by Aditya Kumar on September 16, 2016 at 3:02pm

बहुत बहुत धन्यवाद् आदरणीया   KALPANA BHATT  जी 

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on September 15, 2016 at 9:33pm

बहुत सुंदर रचना | हार्दिक बधाई |

Comment by Aditya Kumar on September 15, 2016 at 5:46pm

बहुत बहुत धन्यवाद् आदरणीया  Alka Changa  जी 

Comment by अलका 'कृष्णांशी' on September 15, 2016 at 5:19pm

बहुत सुन्दर ....बधाई 

Comment by Aditya Kumar on September 15, 2016 at 3:37pm

हार्दिक धन्यवाद् आदरणीय  Samar kabeer जी 

Comment by Aditya Kumar on September 15, 2016 at 3:36pm

हार्दिक धन्यवाद् आदरणीया   Meena Pathak जी 

Comment by Samar kabeer on September 15, 2016 at 3:30pm
जनाब आदित्य राणा जी आदाब,इस सुंदर प्रस्तुति के लिये बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Meena Pathak on September 15, 2016 at 3:18pm

बहुत बहुत सुन्दर ....बधाई 

Comment by Aditya Kumar on September 15, 2016 at 12:42pm

धन्यवाद् आदरणीय ram shiromani pathak जी  !

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